स्पेशल Doodle के जरिए Leap Year मना रहा Google

स्पेशल Doodle के जरिए Leap Year मना रहा Google
स्पेशल Doodle के जरिए Leap Year मना रहा Google

नई दिल्ली। Google हर खास दिन को अपने स्पेशल Doodle के ज़रिए सेलिब्रेट करता है। ऐसे में आज गूगल ने डूडल में लीप डे (Leap Day) को दिखाया है। लीप डे हर चार साल में आने वाले लीप इयर में आता है, यह दिन 29 फरवरी का होता है। पिछला लीप डे 2016 में आया था, लीप डे हमारे कैलेंडर के पृथ्वी और सूर्य की चाल से तालमेल बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।

Google Doodle Celebrates Leap Year :

आज गूगल ने अपने डूडल में लोगो बदला है और इसमें 28, 29, और 1 अंक दिखाया गया है जो फरवरी और मार्च के बीच हर चार साल में आने वाले एक अतिरिक्त दिन यानी कि 29 फरवरी को दर्शाता है। अगला लीप ईयर अब साल 2024 और साल 2028 में होगा।

क्या है लीप ईयर

लीप ईयर वह साल होता है जिसमें 366 दिन होते हैं। लीप डे की वजह से ही फरवरी को साल का सबसे छोटा महीना कहा जाता है। गूगल ने अपने डूडल के माध्यम से समझाते हुए कहा है, ‘हमें लीप ईयर की जूरूरत इसलिए ताकि कैलेंडर का संतुलन पृथ्वी द्वारा सूर्य का चक्कर लगाने पर बना रहे। ऐसा न होने पर हर साल इसमें 6 घंटे का फर्क आ जाएगा’।

आमतौर पर यह कहा जाता है कि धरती सूर्य का पूरा चक्कर 365 दिन में लगाती है, लेकिन सच यह है कि धरती का खगोलीय वर्ष 365.25 दिन का होता है, यानि धरती 365 दिन और 6 घंटे में सूरज का एक चक्कर पूरा करती है।

नई दिल्ली। Google हर खास दिन को अपने स्पेशल Doodle के ज़रिए सेलिब्रेट करता है। ऐसे में आज गूगल ने डूडल में लीप डे (Leap Day) को दिखाया है। लीप डे हर चार साल में आने वाले लीप इयर में आता है, यह दिन 29 फरवरी का होता है। पिछला लीप डे 2016 में आया था, लीप डे हमारे कैलेंडर के पृथ्वी और सूर्य की चाल से तालमेल बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। आज गूगल ने अपने डूडल में लोगो बदला है और इसमें 28, 29, और 1 अंक दिखाया गया है जो फरवरी और मार्च के बीच हर चार साल में आने वाले एक अतिरिक्त दिन यानी कि 29 फरवरी को दर्शाता है। अगला लीप ईयर अब साल 2024 और साल 2028 में होगा। क्या है लीप ईयर लीप ईयर वह साल होता है जिसमें 366 दिन होते हैं। लीप डे की वजह से ही फरवरी को साल का सबसे छोटा महीना कहा जाता है। गूगल ने अपने डूडल के माध्यम से समझाते हुए कहा है, 'हमें लीप ईयर की जूरूरत इसलिए ताकि कैलेंडर का संतुलन पृथ्वी द्वारा सूर्य का चक्कर लगाने पर बना रहे। ऐसा न होने पर हर साल इसमें 6 घंटे का फर्क आ जाएगा'। आमतौर पर यह कहा जाता है कि धरती सूर्य का पूरा चक्कर 365 दिन में लगाती है, लेकिन सच यह है कि धरती का खगोलीय वर्ष 365.25 दिन का होता है, यानि धरती 365 दिन और 6 घंटे में सूरज का एक चक्कर पूरा करती है।