Kaifi Azmi 101st Birthday: महान शायर को श्रद्धांजलि देने के लिए Google ने बनाया खास Doodle

Kaifi Azmi 101st Birthday: महान शायर को श्रद्धांजलि देने के लिए Google ने बनाया खास Doodle
Kaifi Azmi 101st Birthday: महान शायर को श्रद्धांजलि देने के लिए Google ने बनाया खास Doodle

नई दिल्ली। आज महान शायर कैफी आजमी की 101वीं जयंती है और इस मौके पर गूगल ने खास डूडल बनाकर उन्हे याद दिया। कैफी आजमी ने कविताओं से लेकर बॉलीवुड तक के लिए लिखा था। साफतौर पर यह कहा जा सकता है कि वो इस सदी के महानतम शायरों में से एक थे।

Google Doodle Celebrates Poet Reformer Kaifi Azmi 101st Birth Anniversary :

बता दें कि उनका जन्म यूपी के आजमगढ़ में हुआ था और उन्होंने अपनी पहली कविता महज 11 साल की उम्र में ही लिख डाली थी। उस दौरान वे गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन से काफी प्रेरित थे हालांकि बाद में वो मुंबई चले गए और एक उर्दू अखबार के लिए लिखना शुरू कर दिया। 1943 में उनकी ‘झंकार’ नाम की पहली कविता संग्रह प्रकाशित हुई थी।

शिक्षा की बात करें तो उन्होने मदरसे में अपनी पढ़ाई पूरी की थी जबकि उनके बाकी भाईयों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाया गया था, दरअसल पिता ने जमींदारी छोड़ दी थी और ऐसे में सभी बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाना मुमकिन ना था। साथ ही उनके पिता चाहते थे कि एक बच्चे को कम से कम फातिहा पढ़ना आना चाहिए ताकि उनकी मृत्यु के बाद कोई ठीक से फातिहा पढ़ सके। कहीं न कहीं यही कारण था कि कैफी ने शबाना को अंग्रेजी स्कूल में दाखिल कराया लेकिन एडमिशन के वक्त स्कूल नहीं गए।

अपने जीवन में कैफी आजमी कई अवार्ड से नवाजे गए। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर मिला, पद्मश्री मिला, साहित्य अकादमी पुरुस्कार के साथ और भी कई बड़े अवार्ड्स से उन्हें नवाजा गया। कैफी को ऐसी नज्में लिखने के लिए जाना जाता है जो काफी प्रोगरेसिव थीं।

नई दिल्ली। आज महान शायर कैफी आजमी की 101वीं जयंती है और इस मौके पर गूगल ने खास डूडल बनाकर उन्हे याद दिया। कैफी आजमी ने कविताओं से लेकर बॉलीवुड तक के लिए लिखा था। साफतौर पर यह कहा जा सकता है कि वो इस सदी के महानतम शायरों में से एक थे। बता दें कि उनका जन्म यूपी के आजमगढ़ में हुआ था और उन्होंने अपनी पहली कविता महज 11 साल की उम्र में ही लिख डाली थी। उस दौरान वे गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन से काफी प्रेरित थे हालांकि बाद में वो मुंबई चले गए और एक उर्दू अखबार के लिए लिखना शुरू कर दिया। 1943 में उनकी 'झंकार' नाम की पहली कविता संग्रह प्रकाशित हुई थी। शिक्षा की बात करें तो उन्होने मदरसे में अपनी पढ़ाई पूरी की थी जबकि उनके बाकी भाईयों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाया गया था, दरअसल पिता ने जमींदारी छोड़ दी थी और ऐसे में सभी बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाना मुमकिन ना था। साथ ही उनके पिता चाहते थे कि एक बच्चे को कम से कम फातिहा पढ़ना आना चाहिए ताकि उनकी मृत्यु के बाद कोई ठीक से फातिहा पढ़ सके। कहीं न कहीं यही कारण था कि कैफी ने शबाना को अंग्रेजी स्कूल में दाखिल कराया लेकिन एडमिशन के वक्त स्कूल नहीं गए। अपने जीवन में कैफी आजमी कई अवार्ड से नवाजे गए। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर मिला, पद्मश्री मिला, साहित्य अकादमी पुरुस्कार के साथ और भी कई बड़े अवार्ड्स से उन्हें नवाजा गया। कैफी को ऐसी नज्में लिखने के लिए जाना जाता है जो काफी प्रोगरेसिव थीं।