तीन सालों में यूपी के मतदाता तक नहीं बन पाए राज्यपाल राम नाईक

लखनऊ। संवैधानिक रूप से देखे तो किसी प्रदेश का राज्यपाल ही उस प्रदेश का प्रथम नागरिक माना जाता है, साथ ही हर नागरिक का कर्तव्य होता है कि वो मतदान कर लोकतन्त्र के पर्व में हिस्सा ले। यह सब हम इसलिए कह रहे है क्योकि ऐसा ही कुछ है यूपी में। यूपी के राज्यपाल अपने तीन सालों के कार्यकाल में एक बार भी मतदान नहीं कर पाये है, कारण है बतौर मतदाता लखनऊ में सूचिबद्ध न होना।



सूत्रों की माने तो यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने हाल ही में सम्पन्न हुए यूपी के विधानसभा चुनावों में मतदान नहीं किया। आमतौर पर देखा जाता है कि चुनावों में चर्चित हस्तियां सामने आकर अपने मताधिकार का प्रयोग करतीं हैं। माना जाता है कि उनके इस प्रयास से आम मतदाताओं में मताधिकार के प्रयोग को लेकर गंभीरता आती है और वे अपने मत की ताकत को पहचानते हैं।




वहीं यूपी के राज्यपाल के मतदान न करने के विषय में जानकारी करने पर पता चला कि वह बतौर मतदाता राजधानी लखनऊ की मतदाता सूची का हिस्सा नहीं हैं। प्रदेश का प्रथम नागरिक होने के बावजूद राज्यपाल और उनके परिवार को मतदाता सूची में सम्मलित न किया जाना अपने आप में गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। हालांकि वहीं दूसरी ओर यह जानकारी भी मिली है कि वह बतौर मतदाता मुंबई का पहचान पत्र रखते हैं।