सेरिडॉन जैसी 328 दवाओं पर सरकार ने लगाया बैन, जाने क्यों

सेरिडॉन जैसी 328 दवाओं पर सरकार ने लगाया बैन, जाने क्यों
सेरिडॉन जैसी 328 दवाओं पर सरकार ने लगाया बैन, जाने क्यों

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से स्वास्थ्य के लिए 328 फिक्सड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं की बिक्री और वितरण पर बुधवार तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन दवाओं में सेरिडॉन, दस्त, पेट दर्द व सर्दी-खांसी और मधुमेह में इस्तेमाल होने वाली तमाम दवाएं शामिल हैं, जोकि सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि इस प्रतिबंध के कारण 1.18 लाख करोड़ के दवा उद्योग को करीब 1,500 करोड़ की चपत लगेगी।

Government Bans Saridon And Other 328 Fdc :

क्या होती हैं एफडीसी दवाएं

एफडीसी दवाएं वह होती हैं, जिन्हें दो या दो से अधिक दवाओं को मिलाकर बनाया जाता है। इन दवाओं को लेकर देश में लंबे समय से विवाद चल रहा है। हेल्थ वर्कर्स के साथ ही संसद की एक समिति ने भी इन पर सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि ये दवाइयां बिना मंजूरी और अवैज्ञानिक तरीके से बनाई जाती हैं। सेहत के लिए बहुत खतरनाक होती हैं। कई देशों में इन दवाईयों पर बैन भी है।

गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने 2016 के मार्च में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम यानि 1940 की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्य से 344 एफडीसी के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया था। जिसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा 5 और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था।

हालांकि, इससे प्रभावित उत्पादकों या निर्माताओं ने देश के कई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 15 दिसंबर, 2017 को सुनाए गए फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था।

इन दवाओं पर लगी रोक

सेरिडॉन
विक्स ऐक्शन 500
कोरेक्स
सुमो
जीरोडॉल
फेंसिडील
जिंटाप
डिकोल्ड
कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स
पेन किलर्स
शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से स्वास्थ्य के लिए 328 फिक्सड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं की बिक्री और वितरण पर बुधवार तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन दवाओं में सेरिडॉन, दस्त, पेट दर्द व सर्दी-खांसी और मधुमेह में इस्तेमाल होने वाली तमाम दवाएं शामिल हैं, जोकि सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि इस प्रतिबंध के कारण 1.18 लाख करोड़ के दवा उद्योग को करीब 1,500 करोड़ की चपत लगेगी। क्या होती हैं एफडीसी दवाएं एफडीसी दवाएं वह होती हैं, जिन्हें दो या दो से अधिक दवाओं को मिलाकर बनाया जाता है। इन दवाओं को लेकर देश में लंबे समय से विवाद चल रहा है। हेल्थ वर्कर्स के साथ ही संसद की एक समिति ने भी इन पर सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि ये दवाइयां बिना मंजूरी और अवैज्ञानिक तरीके से बनाई जाती हैं। सेहत के लिए बहुत खतरनाक होती हैं। कई देशों में इन दवाईयों पर बैन भी है। गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने 2016 के मार्च में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम यानि 1940 की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्य से 344 एफडीसी के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया था। जिसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा 5 और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि, इससे प्रभावित उत्पादकों या निर्माताओं ने देश के कई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 15 दिसंबर, 2017 को सुनाए गए फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था। इन दवाओं पर लगी रोक सेरिडॉन विक्स ऐक्शन 500 कोरेक्स सुमो जीरोडॉल फेंसिडील जिंटाप डिकोल्ड कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स पेन किलर्स शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं