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गुलाम नबी आजाद से छिना सरकारी बंगला, महबूबा और उमर को भी करना होगा खाली

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने सरकारी बंगलों को खाली करना होगा। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को 1 नवंबर तक अपने आधिकारिक बंगले खाली करने पड़ेंगे। ये सरकारी बंगले जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी पूर्व मुख्‍यमंत्रियों को ताउम्र रहने के लिए मिला करते थे जिनका किराया भी नहीं लगता था, लेकिन अनुच्‍छेद 370 और 35ए के तहत राज्‍य को मिला विशेष दर्जा हटने के बाद अब चीजें बदल गई हैं।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों में गुलाम नबी आजाद पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने सरकारी बंगला खाली कर दिया है। फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती अभी भी सरकारी बंगले में रहते हैं। महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने अपने सरकारी बंगले के नवीनीकरण करीब 50 करोड़ रुपए तक का खर्चा किया था।

1 नवंबर तक खाली करने होंगे सरकारी बंगले

पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्‍दुल्‍ला 5 अगस्‍त से नजरबंद हैं। गुपकर रोड पर इन दोनों के पास भी बड़े सरकारी बंगले हैं। इन दोनों को ये बंगले 1 नवंबर तक खाली करने होंगे। राज्‍य संपत्ति विभाग ने इन मकानों में मौजूद सरकारी चीजों, मसलन फर्नीचर वगैरह की लिस्‍ट बना ली है।

जम्‍मू-कश्‍मीर पुनर्गठन बिल 2019 में ये सुविधाएं खत्‍म

जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्य पेंशन ऐक्‍ट, 1984 के आधार पर पूर्व मुख्‍यमंत्रियों को ये आजीवन सुविधाएं दी जा रही थीं। साल 1996 के बाद से कई बार इसमें संशोधन करके और सुविधा व सहूलियतें बढ़ाई गई थीं। लेकिन जम्‍मू-कश्‍मीर पुनर्गठन बिल 2019 के लागू होने की तारीख, 1 नवंबर के बाद से ये सारे लाभ मिलना बंद हो जाएंगे।

सरकारी बंगलों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं

आजाद को छोड़कर हर पूर्व मुख्‍यमंत्री ने सरकारी बंगलों के सौंदर्यीकरण और आधुनिकीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। उमर अब्‍दुल्‍ला के बंगले में दूसरी सहूलियतों के साथ आधुनिक जिम भी है। 5 अगस्‍त से गुपकर रोड पर मौजूद हरि निवास पैलेस ही उनका अस्‍थाई घर बना हुआ है।

 

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