आखिरकार छात्रवृत्ति घोटाले में हुई कार्रवाई, गृह विभाग ने 109 मामलों में दिए एफआईआर के आदेश

scholership scam
आखिरकार छात्रवृत्ति घोटाले में हुई कार्रवाई, गृह विभाग ने 109 मामलों में दिए एफआईआर के आदेश

लखनऊ। एससी एसटी व पिछड़े वर्ग के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में हुई करोड़ों रूपए के घोटालों में आखिरकार सरकार ने कार्रवाई के आदेश ​दे ही दिए। मामले की जांच कर रही ईओडब्लू ने घोटाले के 117 मामलों की जांच के बाद एलपीआर, एफआईआर व फाइनल रिपोर्ट के लिए शासन को भेजे गए थे। शासन ने 109 मामलों में एफआईआर दर्ज करने की ईओडब्ल्यू की सिफारिश मंजूर कर ली है।

Government Give Order For Fir In 109 Cases Of Scholership Scam :

बता दें कि आठ मामलों में ईओडब्ल्यू ने फाइनल रिपोर्ट की सिफारिश की थी। उसे भी शासन ने मान लिया है। जिन मामलों में एफआईआर की मंजूरी मिली है उनमें से 86 इटावा और 23 मेरठ के हैं। इटावा के आठ मामलों में गड़बड़ी नहीं मिली है। मेरठ व कानपुर समेत अन्य जिलों से जुड़े छात्रवृत्ति घोटाले के 100 से ज्यादा मामलों की जांच चल रही है।

छात्रवृत्ति घोटाले में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बीएसए, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के अलावा करीब 200 स्कूल संचालकों व प्रधानाचार्यों की संलिप्तता सामने आई है। ईओडब्ल्यू की जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जहां कागजों में छात्रवृत्ति बांट दी गई। मेरठ और इटावा में करीब 15 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की बात सामने आ रही है।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि छात्रवृत्ति के रूप में छात्रों को मिलने वाला 10 करोड़ रूपए छात्रों के बजाए अधिका​रियों में ही बंट गया। धोखाधड़ी के ये सभी मामले ईओडब्ल्यू के मेरठ और कानपुर के थानों में दर्ज होंगे। गृह विभाग ने मंगलवार को ईओडब्ल्यू के लखनऊ, कानपुर, मेरठ व वाराणसी में चार थानों के लिए भी अधिसूचना जारी कर दी है।

लखनऊ। एससी एसटी व पिछड़े वर्ग के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में हुई करोड़ों रूपए के घोटालों में आखिरकार सरकार ने कार्रवाई के आदेश ​दे ही दिए। मामले की जांच कर रही ईओडब्लू ने घोटाले के 117 मामलों की जांच के बाद एलपीआर, एफआईआर व फाइनल रिपोर्ट के लिए शासन को भेजे गए थे। शासन ने 109 मामलों में एफआईआर दर्ज करने की ईओडब्ल्यू की सिफारिश मंजूर कर ली है। बता दें कि आठ मामलों में ईओडब्ल्यू ने फाइनल रिपोर्ट की सिफारिश की थी। उसे भी शासन ने मान लिया है। जिन मामलों में एफआईआर की मंजूरी मिली है उनमें से 86 इटावा और 23 मेरठ के हैं। इटावा के आठ मामलों में गड़बड़ी नहीं मिली है। मेरठ व कानपुर समेत अन्य जिलों से जुड़े छात्रवृत्ति घोटाले के 100 से ज्यादा मामलों की जांच चल रही है। छात्रवृत्ति घोटाले में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बीएसए, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के अलावा करीब 200 स्कूल संचालकों व प्रधानाचार्यों की संलिप्तता सामने आई है। ईओडब्ल्यू की जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जहां कागजों में छात्रवृत्ति बांट दी गई। मेरठ और इटावा में करीब 15 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की बात सामने आ रही है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि छात्रवृत्ति के रूप में छात्रों को मिलने वाला 10 करोड़ रूपए छात्रों के बजाए अधिका​रियों में ही बंट गया। धोखाधड़ी के ये सभी मामले ईओडब्ल्यू के मेरठ और कानपुर के थानों में दर्ज होंगे। गृह विभाग ने मंगलवार को ईओडब्ल्यू के लखनऊ, कानपुर, मेरठ व वाराणसी में चार थानों के लिए भी अधिसूचना जारी कर दी है।