मोदी सरकार का एयरफोर्स को बड़ा तोहफा, इजरायल से मंगाए जाएंगे 54 HAROP ड्रोन

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सुरक्षा कारणों से हाई अलर्ट पर एयरपोर्ट, कई उड़ानें रद्द

नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना की मानवरहित युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 54 इजरायली HAROP ड्रोन की खरीद को मंजूरी दे दी है यह ड्रोन इजराइल से खरीदे जाएंगे। हारोप किसी भी शक्तिशाली दुश्मन ठिकाने को तबाह करने की क्षमता रखते हैं इसीलिए इन्हें इजराइल में किलर ड्रोन भी कहा जाता है। सरकार ने थलसेना और नौसेना के लिए असॉल्ट राइफल और 111 नेवल हेलिकॉप्टर खरीदने के करार किए हैं।

Government Nod For 54 Killer Drones From Israel For Indian Air Force :

चीन और पाकिस्तान के बॉर्डर पर किया जाएगा तैनात

न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक पिछले सप्ताह एक हाई लेवल मीटिंग में रक्षा मंत्रालय ने इन 54 हमलावर ड्रोनों की खरीद को मंजूरी दे दी थी। भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने कहा कि ये प्रोजेक्ट वायु सेना की क्षमताओं को और मजबूत कर देगा। इसकी क्षमताओं का प्रदर्शन आगामी अभ्यास वायुशक्ति के दौरान देखने को मिल सकता है। जहां इसे एक नकली दुश्मन राडार टारगेट को नष्ट करते हुए दिखाया जाएगा।

भारत इजरायल के साथ प्रोजेक्ट चीता पर भी बातचीत कर रहा है जिसके तहत तीनों सेनाओं के लगभग सभी ड्रोन को उच्च गुणवत्ता वाले किलर ड्रोन में बदल दिया जाएगा और उनकी निगरानी क्षमताओं को भी बढ़ाया जाएगा। तीनों सेनाओं के पास इन मानव रहित हवाई वाहनों के 100 से अधिक बेड़े हैं। सेना स्वदेशी लड़ाकू ड्रोन विकसित करने पर भी काम कर रही है, इस प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद इन्हें चीन और पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात किया जाएगा।

क्या है खासियत?

आपको बता दें ये ड्रोन इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर से लैस होते हैं। जो विस्फोट करने से पहले हाई वैल्यू वाले सैन्य ठिकानों जैसे निगरानी के ठिकाने और रडार स्टेशनों पर निगरानी भी कर सकते हैं। इजराइल के हारोप ड्रोन दुश्मन ठिकानों पर क्रैश होकर उन्हें तबाह कर देते हैं। इनमें इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर भी लगा होता है, जिससे ठिकाने के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास ऐसे 110 ड्रोन हैं, जिनका नाम पी-4 रखा गया है।

वैसे सिर्फ वायुसेना ही नहीं, मोदी सरकार ने नौसेना के लिए 111 हेलिकॉप्टर खरीदने का फैसला किया है। ये सभी हेलिकॉप्टर रणनीतिगत साझेदारी (एसपी) मॉडल के तहत खरीदे जाएंगे। आर्मी के लिए भी 72 हजार सिग सॉर असॉल्ट राइफल्स खरीदे जाएंगे। इसके लिए मोदी सरकार ने जर्मनी की कंपनी से करार किया है। यह निर्णय फास्ट्रैक प्रक्रिया के तहत लिया गया है।

नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना की मानवरहित युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 54 इजरायली HAROP ड्रोन की खरीद को मंजूरी दे दी है यह ड्रोन इजराइल से खरीदे जाएंगे। हारोप किसी भी शक्तिशाली दुश्मन ठिकाने को तबाह करने की क्षमता रखते हैं इसीलिए इन्हें इजराइल में किलर ड्रोन भी कहा जाता है। सरकार ने थलसेना और नौसेना के लिए असॉल्ट राइफल और 111 नेवल हेलिकॉप्टर खरीदने के करार किए हैं। चीन और पाकिस्तान के बॉर्डर पर किया जाएगा तैनात न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक पिछले सप्ताह एक हाई लेवल मीटिंग में रक्षा मंत्रालय ने इन 54 हमलावर ड्रोनों की खरीद को मंजूरी दे दी थी। भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने कहा कि ये प्रोजेक्ट वायु सेना की क्षमताओं को और मजबूत कर देगा। इसकी क्षमताओं का प्रदर्शन आगामी अभ्यास वायुशक्ति के दौरान देखने को मिल सकता है। जहां इसे एक नकली दुश्मन राडार टारगेट को नष्ट करते हुए दिखाया जाएगा। भारत इजरायल के साथ प्रोजेक्ट चीता पर भी बातचीत कर रहा है जिसके तहत तीनों सेनाओं के लगभग सभी ड्रोन को उच्च गुणवत्ता वाले किलर ड्रोन में बदल दिया जाएगा और उनकी निगरानी क्षमताओं को भी बढ़ाया जाएगा। तीनों सेनाओं के पास इन मानव रहित हवाई वाहनों के 100 से अधिक बेड़े हैं। सेना स्वदेशी लड़ाकू ड्रोन विकसित करने पर भी काम कर रही है, इस प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद इन्हें चीन और पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात किया जाएगा। क्या है खासियत? आपको बता दें ये ड्रोन इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर से लैस होते हैं। जो विस्फोट करने से पहले हाई वैल्यू वाले सैन्य ठिकानों जैसे निगरानी के ठिकाने और रडार स्टेशनों पर निगरानी भी कर सकते हैं। इजराइल के हारोप ड्रोन दुश्मन ठिकानों पर क्रैश होकर उन्हें तबाह कर देते हैं। इनमें इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर भी लगा होता है, जिससे ठिकाने के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास ऐसे 110 ड्रोन हैं, जिनका नाम पी-4 रखा गया है। वैसे सिर्फ वायुसेना ही नहीं, मोदी सरकार ने नौसेना के लिए 111 हेलिकॉप्टर खरीदने का फैसला किया है। ये सभी हेलिकॉप्टर रणनीतिगत साझेदारी (एसपी) मॉडल के तहत खरीदे जाएंगे। आर्मी के लिए भी 72 हजार सिग सॉर असॉल्ट राइफल्स खरीदे जाएंगे। इसके लिए मोदी सरकार ने जर्मनी की कंपनी से करार किया है। यह निर्णय फास्ट्रैक प्रक्रिया के तहत लिया गया है।