मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 15 अफसरों को जबरन किया रिटायर, इससे पहले 12 पर गिरी थी गाज

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नई दिल्ली। के​न्द्र की मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। केन्द्रिय अप्रत्यक्ष कर व कस्टम बोर्ड के 15 बड़े अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया गया है। केन्द्र सरकार की इस कार्रवाई के बाद से हड़कंप मच गया है। वहीं इससे पूर्व 12 बड़े अफसरों पर दस जून को कार्रवाई हुई थी। इस दौरान उनसे इस्तीफा मांग लिया गया था।

Government Of India Compulsorily Retired 15 Very Senior Officers Tax Department :

इन सभी अधिकारियों पर पद पर रहते हुए नियमावली के विपरीत कार्य करने का दोषी पाया गया है। सरकार ने विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा सिफारिश मिलने के बाद ऐसा करने का निर्णय लिया है। यह विभाग भी वित्त मंत्रालय के अंदर आता है। जिन अधिकारियों को सरकार ने पदमुक्त करने का आदेश दिया है वो प्रमुख आयुक्त, आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपआयुक्त के पद पर तैनात हैं। वित्त मंत्रालय ने नियम 56 के तहत ऐसा किया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के जरिए यह जानकारी दी है।

माना जा रहा है कि ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा आलसी और न के बराबर काम करने वाले अधिकारियों को सेवा से मुक्त करना है। रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार ने खराब परफॉर्मेंस करने वाले अधिकारियों की लिस्ट भी बनाई है। वहीं अनिवार्य रिटायरमेंट दिए जाने से सरकार की इस प्रक्रिया के जरिए रोजगार में भी इजाफा होगा, क्योंकि सरकारी पद खाली होंगे तो उस पर भर्ती के लिए सरकार के जरिए रिक्तियां भी निकाली जाने की संभावनाएं है।

नई दिल्ली। के​न्द्र की मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। केन्द्रिय अप्रत्यक्ष कर व कस्टम बोर्ड के 15 बड़े अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया गया है। केन्द्र सरकार की इस कार्रवाई के बाद से हड़कंप मच गया है। वहीं इससे पूर्व 12 बड़े अफसरों पर दस जून को कार्रवाई हुई थी। इस दौरान उनसे इस्तीफा मांग लिया गया था। इन सभी अधिकारियों पर पद पर रहते हुए नियमावली के विपरीत कार्य करने का दोषी पाया गया है। सरकार ने विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा सिफारिश मिलने के बाद ऐसा करने का निर्णय लिया है। यह विभाग भी वित्त मंत्रालय के अंदर आता है। जिन अधिकारियों को सरकार ने पदमुक्त करने का आदेश दिया है वो प्रमुख आयुक्त, आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपआयुक्त के पद पर तैनात हैं। वित्त मंत्रालय ने नियम 56 के तहत ऐसा किया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के जरिए यह जानकारी दी है। माना जा रहा है कि ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा आलसी और न के बराबर काम करने वाले अधिकारियों को सेवा से मुक्त करना है। रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार ने खराब परफॉर्मेंस करने वाले अधिकारियों की लिस्ट भी बनाई है। वहीं अनिवार्य रिटायरमेंट दिए जाने से सरकार की इस प्रक्रिया के जरिए रोजगार में भी इजाफा होगा, क्योंकि सरकारी पद खाली होंगे तो उस पर भर्ती के लिए सरकार के जरिए रिक्तियां भी निकाली जाने की संभावनाएं है।