देश की टकसालों ने सिक्कों का प्रोडक्शन रोका

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देश की टकसालों ने सिक्कों का प्रोडक्शन रोका

नई दिल्ली। भारत सरकार की नोएडा, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद स्थित सिक्का टकसालों ने मुद्रण बदं कर दिया है। आरबीआई की ओर से बताया गया है कि बाजार में सिक्कों की अधिकता के चलते सिक्के बनाने का काम रोक दिया गया गया है। बाजार के अलावा आरबीआई के स्टॉक में भी भारी तादात में सिक्के मौजूद है, जिस वजह से मंगलवार से टकसालों को बंद करने का फैसला लिया गया है।

Government Operated Mints Stops Production :

सूत्रों की माने तो साल 2016 में लागू हुई नोटबंदी के दौरान बाजार में करेंसी की कमी को दूर करने के लिए बड़ी तादात में सिक्कों का मुद्रण किया गया था। अब नई नोट करेंसी पर्याप्त मात्रा में पहुंच चुकी है, जिस वजह से बैंकों को सिक्कों में व्यवहार करने में पेरशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मोदी सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को देश में नोटबंदी का फैसला लागू किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक देर शाम पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को गैर-कानूनी करार दिया था। इस फैसले के पीछे केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार और काला धन को खत्म करने का तर्क दिया था। नोटबंदी लागू होने के बाद देश में नगदी को लेकर लंबे समय तक अफरातफरी का माहौल रहा था।

आपको बता दें कि देश में ​प्रचलित सिक्कों की अधिकता के कारण कारोबारियों और बैंक कर्मियों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नोटबंदी के दौरान बैकों ने अपने ग्राहकों को जमकर सिक्के बांटे थे, लेकिन अब बड़े नोटों के आने के बाद ये सिक्कों का प्रचलन कम हो गया है। अब ग्राहक सिक्कों को लेकर बैंकों में पहुंचते हैं तो बैंककर्मी सिक्कों की गिनती की परेशानी से बचने के लिए उन्हें स्वीकार करने से मना कर देते हैं। जिससे बैंकिंग की व्यवहारिकता प्रभावित हो रही थी।

 

नई दिल्ली। भारत सरकार की नोएडा, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद स्थित सिक्का टकसालों ने मुद्रण बदं कर दिया है। आरबीआई की ओर से बताया गया है कि बाजार में सिक्कों की अधिकता के चलते सिक्के बनाने का काम रोक दिया गया गया है। बाजार के अलावा आरबीआई के स्टॉक में भी भारी तादात में सिक्के मौजूद है, जिस वजह से मंगलवार से टकसालों को बंद करने का फैसला लिया गया है।सूत्रों की माने तो साल 2016 में लागू हुई नोटबंदी के दौरान बाजार में करेंसी की कमी को दूर करने के लिए बड़ी तादात में सिक्कों का मुद्रण किया गया था। अब नई नोट करेंसी पर्याप्त मात्रा में पहुंच चुकी है, जिस वजह से बैंकों को सिक्कों में व्यवहार करने में पेरशानी का सामना करना पड़ रहा है।मोदी सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को देश में नोटबंदी का फैसला लागू किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक देर शाम पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को गैर-कानूनी करार दिया था। इस फैसले के पीछे केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार और काला धन को खत्म करने का तर्क दिया था। नोटबंदी लागू होने के बाद देश में नगदी को लेकर लंबे समय तक अफरातफरी का माहौल रहा था।आपको बता दें कि देश में ​प्रचलित सिक्कों की अधिकता के कारण कारोबारियों और बैंक कर्मियों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नोटबंदी के दौरान बैकों ने अपने ग्राहकों को जमकर सिक्के बांटे थे, लेकिन अब बड़े नोटों के आने के बाद ये सिक्कों का प्रचलन कम हो गया है। अब ग्राहक सिक्कों को लेकर बैंकों में पहुंचते हैं तो बैंककर्मी सिक्कों की गिनती की परेशानी से बचने के लिए उन्हें स्वीकार करने से मना कर देते हैं। जिससे बैंकिंग की व्यवहारिकता प्रभावित हो रही थी।