सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- सोशल मीडिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरा

social media
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- सोशल मीडिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरा

नई दिल्र्ली। केन्द्र सरकार ने सुप्रीम काेर्ट में कहा कि सोशल मीडिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत खतरा है, सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर भड़काऊ बयानाजी, फर्जी खबरें और गैरकानूनी व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में भारी इजाफा हुआ है। सरकार इसे रोकने के लिए कुछ कड़े नियम बनाना चाहती है जिसके लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से तीन महीने का समय मांगा है। सरकार का मानना है कि इंटरनेट की दरें कम होने से लोग सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं।

Government Said In Supreme Court Social Media Threatens Democratic System :

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया कि इंटरनेट व्यवस्था यानी प्रौद्योगिकी से आर्थिक तरक्की और सामाजिक विकास तो हुआ है, लेकिन भड़काऊ भाषण, फर्जी खबरों और राष्ट्र विरोधी गतिविधियां भी काफी ज्यादा तादात में इजाफा हुआ है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को काफी आघात पंहुचा सकता है। सरकार का कहना है कि इंटरनेट सुविधा मुहैया करवाने वाली कम्पनियों के लिए कुछ नियम बनाने की जरूरत है।

सरकार लोगों के अधिकार तथा राष्ट्र की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा में बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के अन्दर कुछ कड़े नियम बना सकती है। आपको बता दें कि सरकार की तरफ से दिेये गये हलफनामें को
जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने रिकाॅर्ड में लिया है। आपको बता दें कि देश में कुल इंटरनेट यूजर्स की संख्या 45.1 करोड़ है।

नई दिल्र्ली। केन्द्र सरकार ने सुप्रीम काेर्ट में कहा कि सोशल मीडिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत खतरा है, सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर भड़काऊ बयानाजी, फर्जी खबरें और गैरकानूनी व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में भारी इजाफा हुआ है। सरकार इसे रोकने के लिए कुछ कड़े नियम बनाना चाहती है जिसके लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से तीन महीने का समय मांगा है। सरकार का मानना है कि इंटरनेट की दरें कम होने से लोग सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया कि इंटरनेट व्यवस्था यानी प्रौद्योगिकी से आर्थिक तरक्की और सामाजिक विकास तो हुआ है, लेकिन भड़काऊ भाषण, फर्जी खबरों और राष्ट्र विरोधी गतिविधियां भी काफी ज्यादा तादात में इजाफा हुआ है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को काफी आघात पंहुचा सकता है। सरकार का कहना है कि इंटरनेट सुविधा मुहैया करवाने वाली कम्पनियों के लिए कुछ नियम बनाने की जरूरत है। सरकार लोगों के अधिकार तथा राष्ट्र की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा में बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के अन्दर कुछ कड़े नियम बना सकती है। आपको बता दें कि सरकार की तरफ से दिेये गये हलफनामें को जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने रिकाॅर्ड में लिया है। आपको बता दें कि देश में कुल इंटरनेट यूजर्स की संख्या 45.1 करोड़ है।