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सरकारी सर्वे : चार दशकों में न्यूनतम स्तर पर पहुंचा उपभोक्ता खर्च, खरीदारी करने में पीछे हटे लोग

Government Survey Consumer Spending Reached The Lowest Level In Four Decades People Lagging Behind In Spending

By शिव मौर्या 
Updated Date

नई दिल्ली। चार दशकों के न्यूनतम स्तर पर उपभोक्ता खर्च पहुंच गया है। लोगा खर्च करने से पीछे हट रहे हैं, जिसके कारण मांग में गिरावट चरम पर पहुंचती जा रही है। सर्वे में सामने आया कि गांव के लोगों ने दूध और दूध से बनने वाले उत्पदों को छोड़कर सभी समानों में कटौती की है। इसके साथ ही देश के लोगों ने जरूरत के समानों जैसे चीनी, नमक, मसाले जैसी जरूरी वस्तुओं की खरीदारी से पीछे हटने लगे हैं।

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ऐसा दावा केंद्र सरकार की संस्था राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सर्वे में किया गया है। हालांकि मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स ऐंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन ने इस सर्वे रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि वह इसे जारी नहीं करेगा क्योंकि रिपोर्ट में खामियां हैं। एनएसओ की ओर से ‘प्रमुख सूचकांक: भारत में घरेलू उपभोक्ता खर्च’ नाम से किए गए सर्वे के मुताबिक, 2017-18 में देशवासियों का व्यक्तिगत औसत मासिक खर्च घटकर 1,446 रुपये पर पहुंच गया जो कि 2011-12 में 1,501 रुपये था।

यह गिरावट 3.70% की है। सर्वे के मुताबिक, 2011-12 में मासिक प्रति व्यक्ति खपत खर्च बढ़कर 13% हो गया था। यह वृद्धि उसके पिछले दो वर्षों की अवधि में हासिल हुई थी। यह सर्वे जुलाई 2017 और जून 2018 के बीच किया गया है। इस सर्वे में सामने आया कि पिछले छह साल में देश के ग्रामीण हिस्सों में लोगों के व्यक्तिगत खर्च में 8.80% की औसत गिरावट आई, जबकि शहरी क्षेत्रों में 2% की गिरावट दर्ज की गई।

गैर-खाद्य वस्तुओं की खपत 7.60% की हुई कमी
सर्वे में सामने आया कि ग्रामीण भारत में गैर-खाद्य वस्तुओं की खपत 7.60% कम हुई है। वहीं शहरी इलाकों में 3.80% की वृद्धि देखी गई। ग्रामीण भारत में 2017-18 में भोजन पर मासिक खर्च औसतन 580 रुपये था जो 2011-12 में 643 रुपये के मुकाबले 10 प्रतिशत कम है। वहीं, शहरी क्षेत्र में इस मद में मामूली बढ़त देखी गई। यहां 2011-12 में लोगों ने 946 रुपये प्रति माह का औसत खर्च किया था जो 2017-18 में महज 3 रुपये बढ़कर 946 रुपये हो गया।

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