गंगा की स्वच्छता को लेकर 111 दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी सानंद का निधन

गंगा की स्वच्छता को लेकर 111 दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी सानंद का निधन
गंगा की स्वच्छता को लेकर 111 दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी सानंद का निधन

नई दिल्ली। गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे। बीते 111 दिन से अनशनरत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो. जी. डी. अग्रवाल) का एम्स ऋषिकेश में गुरुवार को निधन हो गया।

Granga Crusader Professor Gd Agrawal Dies After 111 Days Of Fast :

आईआईटी में प्रोफेसर रह चुके जीडी अग्रवाल इंडियन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में सदस्य भी रह चुके थे। हालांकि अब वह संन्यासी का जीवन जी रहे थे। बता दें कि इससे पहले 13 जून 2011 में गंगा रक्षा की मांग कर रहे निगमानंद की हिमालयन अस्‍पताल जौलीग्रांट में मौत हो गई थी। लगातार 114 दिन अनशन पर रहने के बाद निगमानंद की मौत हुई थी।

बता दें कि गंगा में अवैध खनन, बांधों जैसे बड़े निर्माण और उसकी अविरलता को बनाए रखने के मुद्दे पर पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल अनशन पर थे। स्वामी सानंद गंगा से जुड़े तमाम मुद्दों पर स१रकार को पहले भी कई बार आगाह कर चुके थे और इसी साल फरवरी में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख गंगा के लिए अलग से क़ानून बनाने की मांग की थी। कोई जवाब ना मिलने पर 86 साल के स्वामी सानंद 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे। इस बीच दो केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी उनसे अपना अनशन तोड़ने की अपील की थी, लेकिन वो नहीं माने।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के देहावसान का समाचार पाकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल एम्स पहुंचे। प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने गंगा की सेवा के लिए अपना जीवन आहूत किया है। उन्होंने स्वामी सानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर उनकी मांगे जायज थी, जिन पर विचार किया जाना चाहिए था। संभव है कि सरकार की कुछ मजबूरियां रही हैं।

उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का देहावसान किन कारणों से हुआ यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वामी सानंद का व्रत तुड़वाने के लिए हर संभव प्रयास किया, इसलिए यह कहना गलत है कि केंद्र सरकार स्वामी सानंद के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नहीं थी।

नई दिल्ली। गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे। बीते 111 दिन से अनशनरत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो. जी. डी. अग्रवाल) का एम्स ऋषिकेश में गुरुवार को निधन हो गया।आईआईटी में प्रोफेसर रह चुके जीडी अग्रवाल इंडियन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में सदस्य भी रह चुके थे। हालांकि अब वह संन्यासी का जीवन जी रहे थे। बता दें कि इससे पहले 13 जून 2011 में गंगा रक्षा की मांग कर रहे निगमानंद की हिमालयन अस्‍पताल जौलीग्रांट में मौत हो गई थी। लगातार 114 दिन अनशन पर रहने के बाद निगमानंद की मौत हुई थी।बता दें कि गंगा में अवैध खनन, बांधों जैसे बड़े निर्माण और उसकी अविरलता को बनाए रखने के मुद्दे पर पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल अनशन पर थे। स्वामी सानंद गंगा से जुड़े तमाम मुद्दों पर स१रकार को पहले भी कई बार आगाह कर चुके थे और इसी साल फरवरी में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख गंगा के लिए अलग से क़ानून बनाने की मांग की थी। कोई जवाब ना मिलने पर 86 साल के स्वामी सानंद 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे। इस बीच दो केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी उनसे अपना अनशन तोड़ने की अपील की थी, लेकिन वो नहीं माने।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के देहावसान का समाचार पाकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल एम्स पहुंचे। प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने गंगा की सेवा के लिए अपना जीवन आहूत किया है। उन्होंने स्वामी सानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर उनकी मांगे जायज थी, जिन पर विचार किया जाना चाहिए था। संभव है कि सरकार की कुछ मजबूरियां रही हैं।उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का देहावसान किन कारणों से हुआ यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वामी सानंद का व्रत तुड़वाने के लिए हर संभव प्रयास किया, इसलिए यह कहना गलत है कि केंद्र सरकार स्वामी सानंद के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नहीं थी।