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जीएसटी परिषद बैठक: सरकार ने कपड़ा पर जीएसटी वृद्धि 5 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक टाली

46 वीं जीएसटी परिषद की बैठक: शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 46 वीं जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान वृद्धि को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

By प्रीति कुमारी 
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) काउंसिल ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से कई राज्यों के बाद रेडीमेड गारमेंट्स, फैब्रिक, सिंथेटिक यार्न, कंबल, टेंट सहित कपड़ा उत्पादों पर लगने वाले जीएसटी में बढ़ोतरी को 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का फैसला किया। तमिलनाडु, दिल्ली और पश्चिम बंगाल सहित, ने इस कदम का विरोध किया । सरकार ने इस साल की शुरुआत में बढ़ोतरी को अधिसूचित किया था, जो शनिवार, 1 जनवरी, 2022 से लागू होने वाली है।

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई 46वीं जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान बढ़ोतरी को टालने का फैसला किया गया।  जीएसटी परिषद की बैठक ने कपड़ा पर जीएसटी दर पर यथास्थिति को 5 प्रतिशत तक बनाए रखने और इसे 12 प्रतिशत तक नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। कपड़ा पर जीएसटी दर का मुद्दा कर दर युक्तिकरण समिति को भेजा जाएगा।

वर्तमान में, मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) पर कर की दर 18 प्रतिशत, एमएमएफ यार्न पर 12 प्रतिशत है, जबकि कपड़े पर 5 प्रतिशत कर लगता है। परिषद ने 17 सितंबर को अपनी पिछली बैठक में फुटवियर और कपड़ा क्षेत्रों में उल्टे शुल्क ढांचे को ठीक करने का फैसला किया था।

1 जनवरी, 2022 से सभी फुटवियर पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा, चाहे कीमत कुछ भी हो। यह भी निर्णय लिया गया कि रेडीमेड कपड़ों सहित कपास को छोड़कर कपड़ा उत्पादों पर 12 प्रतिशत की समान जीएसटी दर लागू होगी।

गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने कहा है कि वे 1 जनवरी से कपड़ा पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के पक्ष में नहीं हैं।

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जीएसटी परिषद द्वारा वस्त्रों पर जीएसटी दरों को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की सिफारिश से कपड़ा क्षेत्र में काम करने वाले छोटे व्यापारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की एक बड़ी संख्या प्रभावित होगी, जो अत्यधिक दरों का भुगतान करने के लिए मजबूर होंगे। व्यवस्था लागू है। कपड़ा क्षेत्र के लोगों ने तर्क दिया कि इस तरह के निर्णय से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जिसके परिणामस्वरूप मांग और मंदी में गिरावट आ सकती है।

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