PM मोदी के गृहराज्य में सबसे बड़ी बेहिसाब आमदनी 13,860 करोड़ का खुलासा, जांच में जुटा IT विभाग

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने कालाधन रखने वालों से अपनी बेहिसाब आमदनी का खुलासा करने की अपील की थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात के अहमदाबाद से अब तक की सबसे बेहिसाब आमदनी का खुलासा हुआ है। खुलासा करने वाले गुजरात के प्रापर्टी डीलर महेश शाह हैं। बताया जा रहा है महेश शाह ज्यादा पढे लिखे नहीं हैं। उन्होने सरकार की इनकम डिक्लेरेशन स्कीम के तहत 13,860 करोड़ रुपए की आमदनी का खुलासा किया था। इसके बाद इन्कम टैक्स डिपार्टमेन्ट ने शाह के ठिकानों पर छापेमारी की। महेश शाह अभी फरार बताए जा रहे हैं।




महेश शाह गुजरात में 4-BHK अमार्टमेंट में रहते हैं। वह काम पर ऑटो रिक्शा से जाने के लिए भी मशहूर हैं। उनका घर अहमदाबाद के जोधपुर इलाके में है। वह खास पढ़े-लिखे भी नहीं हैं। उनके सीए तेहमूल सेठना भी शाह के कारोबार के बारे में ठीक-ठीक नहीं बता रहे। हालांकि उन्होंने कहा कि शाह बेहद होशियार हैं। कई बड़े लोगों से उनके कॉन्टैक्ट हैं। वहीं शाह के बेटे मोनीतेश शाह का कहना है कि करीब हफ्तेभर से पिता से उनकी बातचीत नहीं हुई है।




टैक्स ना भरने पर हुई कार्रवाई—

महेश शाह आयकर विभाग की जांच के घेरे में हैं क्योंकि वो घोषित 13860 करोड़ रुपए पर टैक्स देना भूल गए थे। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत 30 सितंबर तक सरकार को 45 प्रतिशत टैक्स देकर अघोषित आय घोषित की जा सकती थी। इस योजना के तहत अघोषित आय पर टैक्स चुकाने के बाद आय की स्वैच्छिक करने वाले पर आयकर विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होनी थी। महेश शाह ने योजना के आखिरी दिन 13860 करोड़ रुपए अघोषित आय की जानकारी आयकर विभाग को दी थी।

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आयकर अधिकारियों के अनुसार महेश शाह को आय की स्वैच्छिक घोषणा के तहत घोषित आय पर दिए जाने वाले टैक्स की 975 करोड़ रुपये की पहली किश्त 30 नवंबर तक चुकानी थी लेकिन वो इससे चूक गए। चूंकि शाह ने टैक्स की पहली किश्त नहीं चुकाई है इसलिए अब उनके द्वारा घोषित 13 हजार करोड़ रुपये कालाधन हो गया है।




दूसरों का कालाधान अपना बताकर किया खुलासा—

सूत्रों की मानें तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में पता चला है कि महेश शाह ने अहमदाबाद के कई नामी-गिरामी लोगों की तरफ से ब्लैकमनी डिक्लेयर की थी। यह पूरा इंतजाम एक सीए ने किया, जिसका नाम अभी बताया नहीं गया है। इनकम टैक्स विभाग अभी जांच कर रहा है। संभव है, जल्द ही इस कालेधन के असली मालिकों के नाम सामने आ जाएं।