गुजरात दंगा : विधानसभा में पेश हुई फाइनल रिपोर्ट, नानावती आयोग ने PM मोदी को दी क्लीन चिट

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गुजरात दंगा : विधानसभा में पेश हुई दंगे की फाइनल रिपोर्ट, नानावती आयोग ने PM मोदी को दी क्लीन चिट

गुजरात। गुजरात दंगे को लेकर गठित जस्टिस जीटी नानावती आयोग की रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में पेश किया गया। गृह मंत्री प्रदीप सिंह ने कहा कि आयोग ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिया है। बता दें कि, गोधरा में वर्ष 2002 में हुए ट्रेन हादसे को लेकर नानावती आयोग का गठन किया गया था।

Gujarat Riots Final Report Of Riots Presented In Vidhan Sabha Nanavati Commission Gave Clean Chit To Pm Modi :

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों को जलाने की घटना के प्रतिक्रियास्वरूप समूचे गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। इसकी जांच के लिए तीन मार्च 2002 को तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति जीटी नानावती की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया।

न्यायमूर्ति केजी शाह आयोग के दूसरे सदस्य थे। 2009 में शाह के निधन के बाद अक्षय मेहता को सदस्य बनाया गया। इसके बाद आयोग को साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी से जुड़े तथ्य और घटनाओं की जांच का काम सौंपा गया था। लेकिन जून 2002 में आयोग को गोधरा कांड के बाद भड़की हिंसा की भी जांच करने के लिए कहा गया। पहले पेश की गई रिपोर्ट में आयोग ने साबरमती एक्सप्रेस की बोगी संख्या-छह में आग लगाने को सुनियोजित साजिश का परिणाम बताया था।

गुजरात। गुजरात दंगे को लेकर गठित जस्टिस जीटी नानावती आयोग की रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में पेश किया गया। गृह मंत्री प्रदीप सिंह ने कहा कि आयोग ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिया है। बता दें कि, गोधरा में वर्ष 2002 में हुए ट्रेन हादसे को लेकर नानावती आयोग का गठन किया गया था। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों को जलाने की घटना के प्रतिक्रियास्वरूप समूचे गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। इसकी जांच के लिए तीन मार्च 2002 को तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति जीटी नानावती की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया। न्यायमूर्ति केजी शाह आयोग के दूसरे सदस्य थे। 2009 में शाह के निधन के बाद अक्षय मेहता को सदस्य बनाया गया। इसके बाद आयोग को साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी से जुड़े तथ्य और घटनाओं की जांच का काम सौंपा गया था। लेकिन जून 2002 में आयोग को गोधरा कांड के बाद भड़की हिंसा की भी जांच करने के लिए कहा गया। पहले पेश की गई रिपोर्ट में आयोग ने साबरमती एक्सप्रेस की बोगी संख्या-छह में आग लगाने को सुनियोजित साजिश का परिणाम बताया था।