गुजरात: रेपिस्ट की फांसी पर SC ने लगाई रोक, 3 साल की बच्ची का किया था रेप-मर्डर

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सूरत: गुजरात के सूरत में 3 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप कर मर्डर करने वाले हैवान को निचली आदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी और 29 फरवरी को फांसी देने का डेथ वारंट भी जारी कर दिया था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर रोक लगा दी है। बता दें कि अनिल सुरेंद्र यादव नाम के आरोपी को बीते अक्टूबर माह में फांसी की सजा सुनाई गयी थी लेकिन अभी तक उसे फांसी नही दी जा सकी।

Gujarat Sc Prohibits Hanging Of Rapist Rape Of 3 Year Old Girl :

जहां एक तरफ देश में रेपिस्टों को फांसी देने की मांग की जा रही है वहीं रेपिस्ट कानूनी दांव पेंच खेलकर बच जाते हैं। निर्भया केस में भी चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाए सालों बीत गये लेकिन अभी तक उन्हे फांसी नही दी जा सकी। ठीक ऐसा ही वाक्या गुजरात के सूरत में भी देखने को मिला। जहां निचली अदालत ने हैवानियत की घटना के बाद आरोपी को फांसी की सजा सुनाई वहीं सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर रोक लगा दी।

आरोपी द्वारा कहा गया है कि सभी कानूनी उपचार समाप्त होने से पहले डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता है। वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए यादव के पास 60 दिन का समय है और इससे पहले डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस ने इस बात से सहमति जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद डेथ वारंट जारी किए जा रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि सभी कानूनी उपचार समाप्त होने से पहले डेथ वारंट जारी नहीं किया जाएगा। जज इस तरह के आदेश कैसे पारित कर सकते हैं? न्यायिक प्रक्रिया इस तरह नहीं हो सकती।

सूरत: गुजरात के सूरत में 3 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप कर मर्डर करने वाले हैवान को निचली आदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी और 29 फरवरी को फांसी देने का डेथ वारंट भी जारी कर दिया था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर रोक लगा दी है। बता दें कि अनिल सुरेंद्र यादव नाम के आरोपी को बीते अक्टूबर माह में फांसी की सजा सुनाई गयी थी लेकिन अभी तक उसे फांसी नही दी जा सकी। जहां एक तरफ देश में रेपिस्टों को फांसी देने की मांग की जा रही है वहीं रेपिस्ट कानूनी दांव पेंच खेलकर बच जाते हैं। निर्भया केस में भी चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाए सालों बीत गये लेकिन अभी तक उन्हे फांसी नही दी जा सकी। ठीक ऐसा ही वाक्या गुजरात के सूरत में भी देखने को मिला। जहां निचली अदालत ने हैवानियत की घटना के बाद आरोपी को फांसी की सजा सुनाई वहीं सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर रोक लगा दी। आरोपी द्वारा कहा गया है कि सभी कानूनी उपचार समाप्त होने से पहले डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता है। वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए यादव के पास 60 दिन का समय है और इससे पहले डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस ने इस बात से सहमति जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद डेथ वारंट जारी किए जा रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि सभी कानूनी उपचार समाप्त होने से पहले डेथ वारंट जारी नहीं किया जाएगा। जज इस तरह के आदेश कैसे पारित कर सकते हैं? न्यायिक प्रक्रिया इस तरह नहीं हो सकती।