हूं नरेंद्र मोदी बनवा मांगू छू….

नई दिल्ली। करीब आधा दर्जन गुजराती और हिंदी फिल्‍में डायरेक्‍ट कर चुके निर्देशक अनिल नरयाणी की जहां गुजराती फिल्‍म ‘बे बार धक्‍का मार’ हिट हुई थी, वहीं हिंदी में राजस्‍थानी पृष्‍ठभूमि पर बनी अर्थपूर्ण फिल्‍म ‘नथ’ काफी सराही गई थी। अब वे एक ऐसी ही फिल्‍म लेकर आ रहे हैं, जो किसी खिलाड़ी, राजनेता या स्‍टार पर नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रारंभिक जीवन से प्रेरित है। जिसका नाम है ‘हूं नरेंद्र मोदी बनवा मांगू छू’। यानि मैं नरेंद्र मोदी बनना चाहता हूं।

फिल्‍म के बारे में बताने से पहले अनिल कहते हैं कि पहले तो हीरोज के बारे में कहना चाहूंगा कि आज बॉलीवुड के किसी भी हीरो को अप्रोच करना चांद पर जाने जैसा हो गया है। जो हीरो कभी-कभार, वो भी बी ग्रेड फिल्‍मों में दिखाई देते हैं, वो करोड़ो की बात करते हैं। लिहाजा मैंने सोचा कि इस बार ऐसी फिल्‍म बनाई जाये, जिसका हीरो हिंदुस्‍तान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ल्‍ड में लोकप्रिय हो। वो थे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।

आज भला उनसे बड़ा हीरो और कौन हो सकता है। उन्‍हें लेकर मैंने अपनी फिल्‍म का खाका तैयार किया। बेस उन्‍हीं का है। कहानी उन्‍हीं को लेकर है, लेकिन आप इसको उनका बायोपिक नहीं कह सकते। ये फिल्‍म बनाने का मुख्‍य कारण मेरा ये भी रहा कि आज आप किसी भी स्‍कूल के बच्‍चे से पूछो तो व‍ह कह पड़ेगा कि बड़ा होकर मुझे डॉक्‍टर बनना है। इंजीनियर बनना है। शाहरूख या सलमान बनना है। मैं चाहता था कि फिल्‍म देखने के बाद कम से कम पचास प्रतिशत बच्‍चे ये कहने लगे कि मैं नरेंद्र मोदी बनना चाहता हूं।

कहानी के बारे में अनिल कहते हैं कि फिल्‍म में एक तेरह साल का बच्‍चा है, जिसकी कहानी मोदी जी से मिलती जुलती है। ये बच्‍चा भी चाय बेचता है और उसका स्‍ट्रगल वैसा ही है जैसा बचपन में मोदी जी का रहा। यानि उसका सपना भी है कि मुझे भी मोदी जैसा बनना है। इस प्रकार फिल्‍म में मैंने बच्‍चे के माध्‍यम से मोदीजी के बचपन का संघर्ष दिखाया है।

उन्होने बताया, मेरा विश्‍वास है कि उनका संघर्ष बच्‍चों को प्रेरित करेगा। जब अनिल से पूछा गया कि फिल्‍म के किसी हिस्‍से में मोदी जी स्‍वंय दिखाई देंगे। तो उनका कहना था कि बिलकुल नहीं। क्‍योंकि कहानी में मुझे इसकी जरूरत ही नहीं दिखाई दी। फिल्‍म के मुख्‍य किरदार में तेरह वर्षीय बच्‍चे को लेकर अनिल नरयाणी कहते हैं कि उसका नाम करण पटेल है।

वह अभी तक 13 -14 गुजराती फिल्‍में कर चुका है। उसे लेने की वजह उसका एक्‍टर होना तो था ही, लेकिन मुख्‍य वजह थी क्‍योंकि उसका चेहरा बिलकुल वैसा दिखाई देता है, जैसे तेरह वर्ष की उम्र में मोदी जी हुआ करते थे। फिल्‍म हिंदी में न हो गुजराती में ही क्‍यों बनाई ? यहां अनिल कहते हैं कि मैंने पहले हिंदी में ही शुरू करने की सोची थी, लेकिन बाद में सोचा गया चूंकि नरेंद्र मोदी जी गुजरात के हैं और मैं फिल्‍म के द्वारा उनका बचपन दिखा रहा था। जो गुजरात में ही बीता था। तो तय हुआ कि पहले फिल्‍म गुजराती में बनाई जाये, अगर उसे अच्‍छा रेस्‍पांस मिलता है तो उसे हिंदी के अलावा अन्‍य कई लोकप्रिय भाषाओं में डब करेंगे।

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क्‍या फिल्‍म के लिए मोदी जी से इजाजत लेने की जरूरत पड़ी थी ? यहां अनिल कहते हैं कि कहानी के लिए तो नहीं लेकिन फिल्‍म के टाइटल के लिए उनसे इजाजत ली गई थी। क्‍योंकि टाइटल उन्‍हीं के नाम पर है और अगर आप किसी का पूरा नाम यूज करते हैं तो उसका पहले अप्रूवल लिया जाता है। फिल्‍म का नाम ‘मैं नरेंद्र मोदी बनवा मांगू छू’ है। हमने इम्‍पा में टाइटल को लेकर एक एप्‍लीकेशन दी थी, बाद में उन्‍होंने मोदी जी के कार्यालय से हमें अप्रूवल दिलाया।

फिल्‍म के प्रोग्रेस के बारे में अनिल कहते हैं कि गुजरात में में उमरगांव के पास एक जगह है पारडी। ये गुजरात के बार्डर पर है और दमन के पास। वहां एक शेड्यूल किया। इसके अलावा बुदवाड़ा, उमरगांव, सूरत आदि जगहों पर दूसरा शेड्यूल किया। अब आखिरी शेड्यूल हम अहमदाबाद में शूट करने वाले हैं। फिल्‍म नवंबर में रिलीज होगी।

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