कारगिल युद्ध में इस भारतीय महिला पायलट ने उड़ाए थे पाकिस्तानियों के छक्के

नई दिल्ली| फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना को आज बहुत कम लोग ही जानते हैं। गुंजन भारत की पहली महिला पायलेट थी। ये वो नाम है जिसने देश के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की। इन्होने कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तानी फ़ौज की भयंकर गोलीबारी के बीच मौत को मात देकर भारतीय जवानों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया था। गुंजन अपनी साथी पायलट श्रीविद्या के साथ कारगिल युद्ध में लड़ने वाली पहली भारतीय महिला लड़ाकू पायलेट थी।




मिली जानकारी के मुताबिक़ आज से 17 साल पहले कारगिल युद्ध के समय लड़ाई में गुंजन और श्रीविद्या को घायल सेनाओं की मदद के लिए भेजा गया। इन दोनों महिलाओं की जिम्मेदारी थी कि पहाड़ी खोह में छिपे पाकिस्तानियों का पता लगाना और घायल भारतीय जवानों को सुरक्षित स्थानों तक पहुचना। ये जानते हुए कि उस इलाके मे पाकिस्तानी सैनिक बुलेट और मिसाइलों से इंडियन एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर्स और एयरक्राफ्ट को देखते ही निशाना बना रहे थे उसके बाद भी वो दोनों बिना डरे मैदान में डटी रहीं। वाकई उन महिलाओं की हिम्मत काबिल-ए-तारीफ़ है। गुंजन को उनके साहस के लिए शौर्य अवॉर्ड भी दिया गया।

लड़ाई के दौरान दोनों एक छोटे चीता हेलिकॉप्टर में थी जिसमे कोई हथियार नहीं था। ऐसे में दोनों अपना सेल्फ डिफेंस भी नहीं कर सकती थी, इसके बावजूद दोनों महिला पायलटों ने उत्तरी कश्मीर के इलाके में कई उड़ाने भरी। कारगिल लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी फौजियों की पॉजिशंस का पता लगाने के लिए दोनों अक्सर पाक पॉजिशंस के बेहद करीब से उड़ान भरती थीं। ऐसे में एक बार गुंजन पर सीधा हमला हुआ। पाक सैनिक ने रॉकेट या कंधे के सहारे दागी जाने वाली मिसाइल सीधे उनके एयरक्राफ्ट पर दाग दी। पाकिस्तानी फौजियों का निशाना चूक गया और मिसाइल एयरक्राफ्ट के पीछे पहाड़ी पर जाकर फटी। गुंजन ने अपनी लोडेड इंसास राइफल और एक रिवॉल्वर के साथ अपनी उड़ान जारी रखी।

रिपोर्ट: आस्था सिंह