MRI मशीन में फंसी पिस्टल ने उड़ाए 51 लाख, खर्च को लेकर संस्थान असमंजस में

लखनऊ। राममनोहर लोहिया रिसर्च इंस्टीट्यूट में यूपी के मंत्री के गनर की पिस्टल एमआरआई मशीन में फंसने के मामले में आरक्षी मुकेश चन्द्र शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। आरक्षी मुकेश चन्द्र शर्मा 32वीं वाहिनी पीएसी में तैनात थे। इस बड़ी चूक से लोहिया हॉस्पिटल में एमआरआई मशीन को ठीक करने में करीब 51 लाख का खर्च आ रहा है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि एमआरआई मशीन की मरम्मत में जो खर्च आएगा, उसका खर्चा कौन वहन करेगा? डायरेक्टर प्रो. दीपक मालवीय का कहना है, इस मामले में चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री आशुतोष टंडन से इस बारे में बात की जा रही है। पहले मशीन बनवाना हमारा लक्ष्य है।


ये था मामला—

  • यूपी सरकार में मंत्री सत्‍यदेव पचौरी अपना एमआरआई कराने अस्पताल पहुंचे थे।
  • इस दौरान अपने सुरक्षाकर्मी को भी कमरे के अंदर ले गए।
  • यहां एमआरआई मशीन की रेंज में आते ही उनके सुरक्षाकर्मी की पिस्टल खिंचकर मशीन में चली गई।
  • मशीन में पिस्टल फंसने से ज़ोरदार आवाज़ के साथ मशीन बंद हो गई।
  • मशीन में पिस्टल फंसने के बाद मंत्री जी समेत हॉस्पिटल का स्टॉप सकते में आ गया और भगदड़ मच गयी।
  • अब इसे ठीक होने में करीब दस दिन का समय लगेगा।




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सुरक्षाकर्मी ने किया पिस्टल निकालने का प्रयास—

  • हॉस्पिटल कर्मियों की मानें तो आरक्षी मुकेश चन्द्र ने एमआरआई मशीन से अपनी पिस्टल निकालने का प्रयास किया था।
  • प्रयास के बाद भी मुकेश चन्द्र उसे हिला तक नहीं पाये।
  • शनिवार को आरक्षी मुकेश चन्द्र को निलंबित कर दिया गया है।
  • अस्पताल के टेक्नीशियन के ध्यान न देने के कारण मुकेश पिस्टल लेकर अंदर चला गया।




मंत्री पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई—

इस हादसे के बाद से कई सवाल उठने शुरू हो गये है। इस मामले में मंत्री सत्‍यदेव पचौरी की तरफ से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है, ना ही उन पर किसी कार्रवाई की बात सरकार की तरफ से की गयी है।

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मरीजों को हो रही परेशानी—

लोहिया इंस्टीट्यूट प्रशासन ने शनिवार सुबह ही कंपनी विप्रो जीई को मशीन बनाने का निर्देश दे दिया है। इंजीनियरों की टीम ने मशीन का निरीक्षण किया। मुख्य इंजीनियर का कहना है कि मशीन ठीक होने में लगभग 15 दिन लग सकते हैं । इस दौरान मशीन का संचालन ठप रहेगा। इस वजह से कई मरीजों को प्राईवेट अस्पताल में जाकर एमआरआई जांच करानी पद रही है। वहीं लोहिया इंस्टीट्यूट का कहना है कि मशीन ठीक होने तक लोहिया की मशीन से मरीजों की जांच कराई जाएगी।


ये हैं नियम—

  • एमआरआई जांच के दौरान तीमारदार को अंदर नहीं आने दिया जाता है।
  • मरीज के पास कोई मेटल का सामान नहीं होना चाहिए।
  • मरीज को अंदर ले जाने से पहले कर्मचारी चेक करते हैं कि उसके पास किसी भी तरह का ऐसा सामान न हो जो चुम्बकीय प्रभाव से मशीन से चिपके।
  • घड़ी, बेल्ट, मोबाइल, पेन समेत कोई भी मेटल और गोल्ड का सामान न हो।




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