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Gyanvapi Case : प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि औरंगजेब ने तोड़ा था मंदिर, क्या अब मोदी सरकार वही गलती करेगी?

वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद को जारी विवाद के बीच देश के मशहूर इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिर तोड़कर औरंगजेब ने गलत काम किया था। वैसे ही अब सरकार भी क्या गलत काम करेगी? उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की मंशा क्या है? 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ दी थी और मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया।

By संतोष सिंह 
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अलीगढ़। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद को जारी विवाद के बीच देश के मशहूर इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिर तोड़कर औरंगजेब ने गलत काम किया था। वैसे ही अब सरकार भी क्या गलत काम करेगी? उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की मंशा क्या है? 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ दी थी और मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया।

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प्रोफेसर इरफान हबीब स्पष्ट तौर पर बताया कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़ा था। उस जमाने में छुपकर काम नहीं होते थे। इतिहास की तारीख में मंदिर तोड़ने की घटना दर्ज है। हिंदू मंदिर के प्रतीक ज्ञानवापी मस्जिद में पाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब भी पुराने समय में मस्जिद या मंदिर बने, तो उसमें बौद्ध विहारों के पत्थर मंदिरों में मिले हैं, तो क्या मंदिरों को तोड़ दिया जाए? उन्होंने कहा कि यह बेवकूफी भरी बातें हैं ऐसी स्थिति में बहुत से मंदिर टूट जाएंगे क्योंकि उसमें बौद्ध धर्म के पत्थर लगाए गए हैं।

हालांकि इरफान हबीब ने कहा कि मैं हिस्टोरियन हूं। पॉलिटिक्स नहीं करता हूं। ज्ञानवापी मस्जिद पर उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, मुझे नहीं मालूम। ज्ञानवापी के कानूनी मसले पर इरफान हबीब बोलने से बचते रहे। प्रोफेसर इरफान हबीब ने स्पष्ट तौर पर बताया कि बनारस का मंदिर औरंगजेब ने तोड़ा था और मथुरा का भी मंदिर इसमें शामिल है, जिसे राजा वीर सिंह बुंदेला ने जहांगीर के शासनकाल में बनवाया था। उन्होंने बताया कि यह दो मंदिर प्रमुख हैं, जिसे औरंगजेब ने तोड़ा था और इसमें कोई दो राय नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो चीज सन 1670 में बन गई हो क्या अब उसे तोड़ सकते हैं? यह स्मारक एक्ट के खिलाफ है।

काशी और मथुरा के मंदिरों को औरंगजेब ने तोड़ा था
प्रो. इरफान हबीब कहते हैं कि मंदिर जानकर ही औरंगजेब ने काशी, मथुरा का मंदिर तोड़ा था। बनारस का मंदिर कितना पुराना है इसके बारे में खुलकर नहीं बताया, लेकिन मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर जहांगीर के समय में भव्य बनाया गया था। मंदिर तोड़ने के बाद औरंगजेब ने कहा था कि मैं मंदिर नहीं बनने दूंगा। हालांकि मुगल काल में मंदिर बने हैं, लेकिन काशी, मथुरा के मंदिर औरंगजेब ने तोड़ा था। अयोध्या में मंदिर बनने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सन् 1992 में अयोध्या में मस्जिद तोड़ दी गई उसको चाहे जितना बुरा–भला कहें, लेकिन मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया। नई इमारत अब बना सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी अब जमीन दे दी है।

ज्ञानवापी मामले में शिवलिंग को बनाया जा रहा मुद्दा
प्रोफेसर इरफान हबीब ने बताया कि ज्ञानवापी में शिवलिंग की बात कही जा रही है, लेकिन जो याचिका दाखिल की गई थी उसमें जिक्र नहीं था। शिवलिंग बनाने का एक कायदा होता है। हर चीज को शिवलिंग नहीं बता सकते। उन्होंने कहा कि जो मुकदमा दायर किया गया उसमें शिवलिंग का जिक्र नहीं था लेकिन अब शिवलिंग को मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले जब मंदिर तोड़े गए, तो उसके पत्थर मस्जिदों में इस्तेमाल किए गए। बहुत सी मस्जिदों में हिंदू प्रतीकों के पत्थर प्रयोग किए गए थे।

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प्रोफेसर इरफान हबीब ने बताया कि बहुत से मंदिरों में भी बौद्ध धर्म से जुड़े पत्थर मिल जाएंगे। राणा कुंभा का चित्तौड़ में बड़ा मीनार है। उसके एक पत्थर पर अरबी में ‘अल्लाह’ लिखा है तो उसे मस्जिद नहीं कह सकते। यह बेवकूफी भरी बातें हैं। क्या मुसलमान कहेंगे कि यह मस्जिद है और हमें दे दिया जाए?

कौन हैं प्रोफेसर इरफान हबीब
बता दें प्रो इरफान हबीब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। 90 साल के इरफान हबीब दुनिया के यूनिवर्सिटीज में लेक्चर देने के लिए बुलाए जाते हैं। इरफान हबीब मध्यकालीन इतिहास के बड़े जानकार हैं। उनको पढ़े बिना मध्यकालीन इतिहास का सिलेबस पूरा नहीं हो सकता। इरफान हबीब मध्यकालीन और प्राचीन भारत के ज्ञाता हैं उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही इरफान हबीब हिंदुत्व और मुस्लिम सांप्रदायिकता के खिलाफ कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं। मुगल हिस्ट्री पर उनकी दर्जनों किताबें हैं।

 

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