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हाल-ए-शिक्षा विभाग: जिनकी नियुक्ति के दस्तावेज नहीं, उनके वेतन पर भी खर्च हो रहे हैं करोड़ों रुपये!

By शिव मौर्या 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में भी भ्रष्टाचारियों की जड़े मजबूत हैं। वह कई तरीकों से सरकार के खजाने को खाली करने में जुटे हैं। कभी फर्जी नियुक्ति दिखाकर तो कभी अन्य तरीके से फर्जीवाड़ा करके यूपी सरकार के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। गोण्डा के 28 स्कूलों में भ्रष्टाचारियों की करतूत जांच में उजागर हुई है, जिसमें वह लाखों रुपये इधर—उधर कर रहे थे।

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ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग में मौजूद भ्रष्टाचारी गोण्डा में ऐसा कर रहे हैं, यह पूरे प्रदेश में इस तरह की जालसाजी का काम कर रहे हैं। बता दें कि, बेसिक शिक्षा विभाग को जब गोण्डा के 28 स्कूलों में गड़बड़ी की शिकायत मिली तो 25 मई 2018 को सचिव ​बेसिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया गया था। समिति की पड़ताल में खुलासा हुआ कि सभी विद्यालयों में कागज पर 4,535 छात्र हैं जबकि मौके पर सिर्फ 1044 मौजूद मिले।

इसके अलावा 146 शिक्षक व अन्य कर्मचारियों में से सिर्फ 70 की ही नियुक्ति की तारीख और दस्तावेज उपलब्ध पाए गए। जांच समिति को पड़ताल के दौरान 76 के बारे में कोई दस्तावेज नहीं मिले। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, उनके वेतन पर हर महीने 94 लाख रुपये खर्च हो रहे थे, काफी दिनों से चल रहा था।

साथ ही 83 कर्मचारियों के चयन के लिए जारी किए गए विज्ञापन की भी प्रति नहीं मिली। जब इस बारे में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने भी अभिलेख नहीं उपलब्ध होने की बात कही। 76 कर्मचारियों के अनिवार्य योग्यता से जुड़े दस्तावेज भी नहीं मिले। वहीं 20 विद्यालयों में से छह की मान्यता और अनुदान सूची में लिए जाने के आदेश, नियुक्ति के लिए पद सृजन के संबंध में भी कोई आदेश नहीं मिले थे।

समिति की जांच में सामने आया कि अधिकारियों व विद्यालय प्रबंधन की मिलीभगत से सरकार को लंबे समय से हर महीने लाखों की चपत लगाई जा रही है। नियुक्ति से जुड़े कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के बाद भी कर्मचारियों को लंबे समय से किस आधार पर वेतन दिया जा रहा है।

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