200 रुपए वाले स्वेटर की खोज में योगी सरकार, ठिठुरते नौनिहाल

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लखनऊ। 250 से 300 रुपए कीमत वाली वस्तु को 200 रुपए में खरीदने का फैसला उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के लिए किरकिरी का सबब बनती जा रही है। आधी सर्दी बीत गई और सरकार 200 रुपए की कीमत वाले स्वेटर की खोज में ही लगी है, जबकि बच्चे सरकार की ओर से मुफ्त मिलने वाले स्वेटर की आस में ठिठुरने को मजबूर हैं।

Half Season Of Winter Passed But Yogi Sarkar Still Hunting For Sweater At Cost Of Rupees 200 :

प्रदेश सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों के बच्चों ​को मिलने वाले स्वेटरों की खरीद की टेंडरिंग को लेकर शासन और विभाग के जिला स्तरीय अाधिकारियों के बीच चले फुटबॉल मैच का परिणाम ड्रा रहने के बाद दबाव में आए शासन ने गेंद शिक्षकों के पाले में छोड़ दी है। नए आदेश के मुताबिक 6 जनवरी से स्कूलों में स्वेटरों के वितरण शुरू हो जाएगा, जिसके लिए स्वेटरों की खरीद स्कूल के शिक्षकों के स्तर पर की जाएगी।

स्वेटरों के खरीद में अब तक सामने आई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों ने शासन के आदेश के खिलाफ जाकर स्वेटर खरीद में असमर्थता जता दी है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब सरकार को 200 रुपए में स्वेटर नहीं मिला तो शिक्षक 200 रुपए वाला स्वेटर कहां से लाएंगे। किन्हीं परिस्थितियों में 200 रुपए में स्वेटर खरीद भी लिया गया तो उसकी गुणवत्ता पर उठने वाले सवालों को लेकर वे जवाबदारी लेना उनके लिए संभव नहीं होगा।

दरअसल योगी सरकार ने शासन स्तर स्वेटरों की खरीद के लिए दिसंबर में टेंडर जारी किया था। जिसमें शामिल हुए सफल सप्लायर्स ने स्वेटरों की न्यूनतम कीमत ढ़ाई सौ से तीन सौ रुपए तक प्रस्तावित की थी। जिसे शासन ने अस्वीकार कर दिया क्योंकि सरकार की अनुमानित कीमत 200 रुपए की थी। तमाम कोशिशों के बाद सरकार को कोई ऐसा सप्लायर नहीं मिला जो 200 रुपए प्रति स्वेटर की कीमत पर अपूर्ति को सुनिश्चित करने को तैयार हो। ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूल स्तर पर शिक्षक 200 रूपए में स्वेटरों की खरीद को कैसे सुनिश्चित कर पाएंगे।

फिलहाल स्वेटरों की आपूर्ति का कोई माध्यम नजर नहीं आ रहा है, शिक्षकों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं, ऐसे में 6 जनवरी को स्वेटर कहां से आएंगे यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

लखनऊ। 250 से 300 रुपए कीमत वाली वस्तु को 200 रुपए में खरीदने का फैसला उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के लिए किरकिरी का सबब बनती जा रही है। आधी सर्दी बीत गई और सरकार 200 रुपए की कीमत वाले स्वेटर की खोज में ही लगी है, जबकि बच्चे सरकार की ओर से मुफ्त मिलने वाले स्वेटर की आस में ठिठुरने को मजबूर हैं।प्रदेश सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों के बच्चों ​को मिलने वाले स्वेटरों की खरीद की टेंडरिंग को लेकर शासन और विभाग के जिला स्तरीय अाधिकारियों के बीच चले फुटबॉल मैच का परिणाम ड्रा रहने के बाद दबाव में आए शासन ने गेंद शिक्षकों के पाले में छोड़ दी है। नए आदेश के मुताबिक 6 जनवरी से स्कूलों में स्वेटरों के वितरण शुरू हो जाएगा, जिसके लिए स्वेटरों की खरीद स्कूल के शिक्षकों के स्तर पर की जाएगी।स्वेटरों के खरीद में अब तक सामने आई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों ने शासन के आदेश के खिलाफ जाकर स्वेटर खरीद में असमर्थता जता दी है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब सरकार को 200 रुपए में स्वेटर नहीं मिला तो शिक्षक 200 रुपए वाला स्वेटर कहां से लाएंगे। किन्हीं परिस्थितियों में 200 रुपए में स्वेटर खरीद भी लिया गया तो उसकी गुणवत्ता पर उठने वाले सवालों को लेकर वे जवाबदारी लेना उनके लिए संभव नहीं होगा।दरअसल योगी सरकार ने शासन स्तर स्वेटरों की खरीद के लिए दिसंबर में टेंडर जारी किया था। जिसमें शामिल हुए सफल सप्लायर्स ने स्वेटरों की न्यूनतम कीमत ढ़ाई सौ से तीन सौ रुपए तक प्रस्तावित की थी। जिसे शासन ने अस्वीकार कर दिया क्योंकि सरकार की अनुमानित कीमत 200 रुपए की थी। तमाम कोशिशों के बाद सरकार को कोई ऐसा सप्लायर नहीं मिला जो 200 रुपए प्रति स्वेटर की कीमत पर अपूर्ति को सुनिश्चित करने को तैयार हो। ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूल स्तर पर शिक्षक 200 रूपए में स्वेटरों की खरीद को कैसे सुनिश्चित कर पाएंगे।फिलहाल स्वेटरों की आपूर्ति का कोई माध्यम नजर नहीं आ रहा है, शिक्षकों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं, ऐसे में 6 जनवरी को स्वेटर कहां से आएंगे यह अपने आप में बड़ा सवाल है।