गड़बड़घोटाला: सिर्फ हॉलमार्क देखकर न खरीदें सोना, हो जाएंगे ठगी का शिकार

purity of gold
गड़बड़घोटाला: सिर्फ हॉलमार्क देखकर न खरीदें सोना, हो जाएंगे ठगी का शिकार

Hallmark Is Not Guarantee For Purity Og Gold

नई दिल्ली। सोने-चांदी की शुद्धता की गारंटी लेने वाला हॉलमार्क भी अब सवालों के घेरे में है। इसका खुलासा तब हुआ जब सरकार ने बीते दो साल में हॉलमार्क में बाद भी शुद्धता के पैमाने पर खरे नहीं उतरने वाले 138 ज्वेलर्स का पंजीकरण निरस्त किया। इस खुलासे के बाद से सरकार ने हॉलमार्क लगाने वाले लगभग 100 से ज्यादा जांच केंद्रों पर कार्रवाई की है। भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों के मुताबिक आभूषण पर दर्ज कैरेट और उसकी शुद्धता में सिर्फ 0.1% अंतर हो सकता है। अब यदि इससे ज्यादा अंतर के आभुषण ग्राहक को दिए जाते हैं तो सरकार ज्वेलर्स और ए एंड एच सेंटर पर कार्रवाई करती है। इस गड़बड़ी की जांच के लिए सरकार समय-समय पर आॅडिट भी कराती है।

बता दें कि उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ो के मुताबिक इस साल 1 अप्रैल से 25 जून नौ ऐसे ज्वेलर्स पर कार्रवाई की है जो आभूषणों पर दर्ज हॉलमार्क से कम कैरेट के आभूषण बेंच रहे थे। इसके अलावा वर्ष 2016-17 में 49 और 2017-18 में 80 ज्वेलर्स का पंजीकरण रद्द किया गया था। बता दें कि हॉलमार्क के लिए पंजीकृत ज्वेलर्स को आभूषणों को एसेईंग एंड हॉलमार्किग (ए एंड एच) सेंटर भेजना होता है। जहां ए एंड एच आभूषणों की शुद्धता की जांच करता है और फिर उन पर हॉलमार्क लगाता है। मौजूदा वक्त देश में करीब 25 हजार ज्वेलर्स के पास हॉलमार्क रजिस्ट्रेशन है।

आपको बता दें कि हॉलमार्क आभूषण को नजदीक के ए एंड एच सेंटर पर जाकर उसकी शुद्धता की जांच कराई जा सकती है। जांच में यदि शुद्धता में गड़बड़ी पाई जाती हैं तो ग्राहक सम्बंधित ज्वेलर्स से मुआवजे की मांग कर सकता है। ऐसी स्थिती में अगर ज्वेलर्स मुआवजा से इंकार करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।

यूपी में 33 जगहों पर होती है शुद्धता की जांच

बता दें कि देश में 600 ए एण्ड एच सेंटर है, जहां आभुषणों की जांच कराई जाती है। सबसे ज्यादा सेंटर महाराष्ट्र में है। जबकि इसके बाद तमिलनाडू और गुजरात का नंबर आता है। वहीं यूपी में 33, उत्तराखण्ड में एक, बिहार में 10, झारखण्ड में चार और दिल्ली में 40 ए एण्ड सेंटर बनाए गए है।

कैरेट की संख्या बढ़ाकर होता है खेल

बताया जाता है कि ज्वेलर्स मार्किंग सेंटर वालों से सेटिंग करके सोने के आभुषणों पर ज्यादा कैरेट वाले हॉलमार्क लगवा लेते है। इससे कम कैरेट वाले आभूषण ज्यादा पैसों में ग्राहकों को मढ़ दिए जाते है। इस खुलासा तो तब होता हैं जब ग्राहक उक्त आभूषण बदलने या बेंचने के लिए जाते है।

सेलेब्रिटीस द्वारा प्रचार करने से हो जाता है ​भरोसा

बता दें कि देश के नामी ज्वेलर्स ग्राहकों को लुभाने के लिए बड़े-बड़े सेलीब्रिटीज और अमिताभ बच्चन, अनुष्का शर्मा व दीपिका पादुकोण जैसे फिल्मी कलाकारों से अपना प्रचार करवाते हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा उन पर बढ़ जाता हैं। ऐसे में ये ज्वेलर्स आसानी से उन्हे अपना शिकार बना लेते है। सूत्रों के मुताबिक ऐसे बड़े प्रतिष्ठानों की मार्केट में विश्वनीयता देखते हुए ग्राहक शुद्धता की ज्यादा जांच भी नही करवाते है। ऐसे में सवाल उठता हैं कि क्या देश के ये नामी-गिरामी लोग भी बड़े ज्वेलर्स से मिले होते हैं या फिर ये लोग उनका नाम प्रयोग कर अपना गोरखधंधा धड़ल्ले से चलाते है।

 

नई दिल्ली। सोने-चांदी की शुद्धता की गारंटी लेने वाला हॉलमार्क भी अब सवालों के घेरे में है। इसका खुलासा तब हुआ जब सरकार ने बीते दो साल में हॉलमार्क में बाद भी शुद्धता के पैमाने पर खरे नहीं उतरने वाले 138 ज्वेलर्स का पंजीकरण निरस्त किया। इस खुलासे के बाद से सरकार ने हॉलमार्क लगाने वाले लगभग 100 से ज्यादा जांच केंद्रों पर कार्रवाई की है। भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों के मुताबिक आभूषण पर दर्ज कैरेट और उसकी शुद्धता…