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हर्ष मंदर: सीएए से पहले कसाब की फांसी का भी किया था विरोध, जानिए प्रोफाइल

By बलराम सिंह 
Updated Date

नई दिल्‍ली। कांग्रेसी नेताओं के करीबी पूर्व आईएएस हर्ष मंदर को लेकर देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। अपने बेतुके बयान से देश न्‍यायपालिका पर सवाल उठाने वाले हर्ष मंदर पहले भी काफी विवादों में रहे हैं। पहले हर्ष मंदर भाजपा के तीन नेताओं के खिलाफ विवादित बयान देने की एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा को लेकर की गई शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्‍द सुनवाई से इनकार कर दिया था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मंदर ने जामिया में हुए धरना प्रदर्शन में न सिर्फ भाग लिया बल्कि वहां पर विवादित बयान भी दिया था। आपको बता दें कि हर्ष मंदर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हैं। पिछले वर्ष 19 दिसंबर को उन्‍हें आईटीओ पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया गया था।

इसके अलावा केंद्र की तरफ से बताया गया कि मंदर ने न्‍यायपालिका के खिलाफ भी विवादित बयान दिए हैं। इन बयानों की एक ट्रांसक्रिप्‍ट कॉपी भी केंद्र की तरफ से कोर्ट के समक्ष पेश की गई थी। इस पर कोर्ट का कहना था कि मंदर पर लगे आरोप काफी गंभीर है। इन आरोपों पर कोर्ट ने मंदर के वकील से जवाब भी मांगा है। इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र से हर उस व्‍यक्ति की भी जानकारी मांगी है जिसने न्‍यायपालिका पर सवाल खड़ा किया है।

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के करीबी
हर्ष मंदर एक पूर्व आईएएस अफसर हैं। मंदर एक एक्‍शन एड के नाम से एक एनजीओ भी चलाते हैं। हर्ष मंदर को कई बड़े कांग्रेसी नेताओं का करीबी माना जाता है। वे मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। सोनिया गांधी इसकी अध्‍यक्ष थीं। इतना ही नहीं उन्‍हें यूपीए के दौरान लाए गए विवादित कम्युनल वायलेंस बिल का चीफ आर्किटेक्‍ट भी कहा जाता है। मंदर की पहचान सिर्फ यहीं पर आकर खत्‍म नहीं हो जाती है। 2008 में मुंबई पर हमला करने वाले आतंकवादी अजमल कसाब और 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन की फांसी रोकने की मांग की थी। ये मांग उस वक्‍त की गई थी जब पूरा देश आंतकी कसाब को जल्‍द से जल्‍द फांसी होने की राह देख रहा था।

सुप्रीम कोर्ट पर की थी यह टिप्पणी
सीएए को लेकर एक वीडियो में हर्ष मंदर कहते दिख रहे हैं, ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं जीती जाएगी। क्योंकि हमने सुप्रीम कोर्ट को देखा है, एनआरसी के मामले में, अयोध्या के मामले में, कश्मीर के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने इंसानियत, समानता और सेक्युरलिज्म की रक्षा नहीं की है। वहां हम कोशिश जरूर करेंगे, हमारा सुप्रीम कोर्ट हैं लेकिन फैसला ना संसद ना सुप्रीम कोर्ट में होगा। एक अन्य वीडियो में हर्ष मंदर को ये कहते सुना जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट अल्‍पसंख्‍यकों के मामले में विफल रहा है। इसको कश्‍मीर, जामिया, अलीगढ़ पर आए फैसलों से भी देखा जा सकता है। उन्‍होंने आगे कहा कि वह नहीं मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इसका फैसला कर सकता है।

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