हरियाणा चुनाव: ‘ताऊ’ की ‘INLD’ हाशिये पर, लेकिन विरासत को आगे बढ़ायेगा ‘जननायक’

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हरियाणा चुनाव: 'ताऊ' की 'INLD' हाशिये पर, लेकिन विरासत को आगे बढ़ायेगा 'जननायक'

नई दिल्ली। हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजों में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन गई है। एक तरफ जहां बीजेपी को झटका लगा है तो वहीं कांग्रेस और जेजेपी को फायदा होता दिखाई दे रहा है। लेकिन इन सब के बीच करीब 20 साल तक हरियाणा की मुख्य पार्टी रही इंडियन नेशनल लोकदल का राज्य की राजनीति से सूपड़ा साफ होता दिखाई दे रहा है।

Haryana Election Inld Of Tau Marginalized But Jananayak Will Carry Forward The Legacy :

लेकिन 5 साल बाद इंडियन नेशनल लोकदल की हालत इतनी खराब हो गई है कि उसका उम्मीदवार सिर्फ एक सीट आगे चल रहा है। अब तक सामने आए रुझानों में इनेलो को सिर्फ 3 फीसदी वोट शेयर मिलता दिख रहा है। इनेलो को सबसे बड़ा नुकसान दुष्यंत चौटाला के अलग होने की वजह से हुआ है। दुष्यंत चौटाला की जेजेपी राज्य में 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और उसने इनेलो को सबसे बड़ी चोट पहुंचाई है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी इंडियन नेशनल लोकदल महज 2 फीसदी वोट ही हासिल कर पाई थी।

अब तक रुझानों के मुताबिक बीजेपी 39 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 32 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। जननायक जनता पार्टी 10 सीटों पर आगे चल रही है। निर्दलीय और अन्य 8 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी हरियाणा की राजनीति से साफ होती जा रही है। 2014 के विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल 19 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। 2014 में कांग्रेस को सिर्फ 15 सीटों पर जीत मिली थी। इतना नहीं नहीं वोट शेयर के मामले में भी इनेलो दूसरे नंबर पर रही थी और उसे 24 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस 21 फीसदी वोट शेयर के साथ तीसरे नंबर की पार्टी बनी थी।

सबसे कम उम्र के सांसद बने थे दुष्यंत

दुष्यंत चौटाला का सफर काफी दिलचस्प रहा है। दुष्यंत चौटाला का राजनातिक सफर 2014 के आम चुनाव से शुरू हुआ। इस चुनाव में उन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस के कुलदीप बिश्नोई को 31,847 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में वो सबसे कम उम्र के सांसद बने, इसके लिए उन्होंने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया।

चाचा ने पिता पर लगाए थे आरोप

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले चौटाला परिवार की लड़ाई सड़क पर आ चुकी थी। इनेलो नेता अभय चौटाला ने अपने बड़े भाई डॉ. अजय चौटाला पर 50-50 लाख रुपये में टिकट बेचने के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही अभय ने आरोप लगाया था कि अजय चौटाला ने बेटे दुष्‍यंत चौटाला को हिसार से सांसद बनवाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं से हाथ मिलाकर पार्टी उम्मीदवारों को हराया है।

ऐसे पड़ी ‘ताऊ’ के कुनबे में दरार

जेबीटी घोटाले में अजय चौटाला के जेल जाने के बाद इंडियन नेशनल लोकदल की पूरी कमान उनके छोटे भाई अभय चौटाला के हाथ में आ गई थी। टीचर भर्ती घोटाले में ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला दोनों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यहीं से परिवार में लड़ाई शुरू हुई। 2018 में चाचा से लड़ाई के बाद दुष्यंत ने जननायक जनता पार्टी का गठन किया।

नई दिल्ली। हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजों में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन गई है। एक तरफ जहां बीजेपी को झटका लगा है तो वहीं कांग्रेस और जेजेपी को फायदा होता दिखाई दे रहा है। लेकिन इन सब के बीच करीब 20 साल तक हरियाणा की मुख्य पार्टी रही इंडियन नेशनल लोकदल का राज्य की राजनीति से सूपड़ा साफ होता दिखाई दे रहा है। लेकिन 5 साल बाद इंडियन नेशनल लोकदल की हालत इतनी खराब हो गई है कि उसका उम्मीदवार सिर्फ एक सीट आगे चल रहा है। अब तक सामने आए रुझानों में इनेलो को सिर्फ 3 फीसदी वोट शेयर मिलता दिख रहा है। इनेलो को सबसे बड़ा नुकसान दुष्यंत चौटाला के अलग होने की वजह से हुआ है। दुष्यंत चौटाला की जेजेपी राज्य में 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और उसने इनेलो को सबसे बड़ी चोट पहुंचाई है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी इंडियन नेशनल लोकदल महज 2 फीसदी वोट ही हासिल कर पाई थी। अब तक रुझानों के मुताबिक बीजेपी 39 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 32 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। जननायक जनता पार्टी 10 सीटों पर आगे चल रही है। निर्दलीय और अन्य 8 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी हरियाणा की राजनीति से साफ होती जा रही है। 2014 के विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल 19 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। 2014 में कांग्रेस को सिर्फ 15 सीटों पर जीत मिली थी। इतना नहीं नहीं वोट शेयर के मामले में भी इनेलो दूसरे नंबर पर रही थी और उसे 24 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस 21 फीसदी वोट शेयर के साथ तीसरे नंबर की पार्टी बनी थी। सबसे कम उम्र के सांसद बने थे दुष्यंत दुष्यंत चौटाला का सफर काफी दिलचस्प रहा है। दुष्यंत चौटाला का राजनातिक सफर 2014 के आम चुनाव से शुरू हुआ। इस चुनाव में उन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस के कुलदीप बिश्नोई को 31,847 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में वो सबसे कम उम्र के सांसद बने, इसके लिए उन्होंने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। चाचा ने पिता पर लगाए थे आरोप लोकसभा चुनाव 2019 से पहले चौटाला परिवार की लड़ाई सड़क पर आ चुकी थी। इनेलो नेता अभय चौटाला ने अपने बड़े भाई डॉ. अजय चौटाला पर 50-50 लाख रुपये में टिकट बेचने के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही अभय ने आरोप लगाया था कि अजय चौटाला ने बेटे दुष्‍यंत चौटाला को हिसार से सांसद बनवाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं से हाथ मिलाकर पार्टी उम्मीदवारों को हराया है। ऐसे पड़ी 'ताऊ' के कुनबे में दरार जेबीटी घोटाले में अजय चौटाला के जेल जाने के बाद इंडियन नेशनल लोकदल की पूरी कमान उनके छोटे भाई अभय चौटाला के हाथ में आ गई थी। टीचर भर्ती घोटाले में ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला दोनों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यहीं से परिवार में लड़ाई शुरू हुई। 2018 में चाचा से लड़ाई के बाद दुष्यंत ने जननायक जनता पार्टी का गठन किया।