गरीब मां को मासूम के इलाज के लिए मांगनी पड़ी भीख, एसडीएम साहब खाते रहे चना

हाथरस न्यूज़, भीख, एसडीएम हाथरस
गरीब मां को मासूम के इलाज के लिए मांगनी पड़ी भीख, एसडीएम साहब खाते रहे चना

हाथरस। यूपी के हाथरस जिले में एक बार फिर मानवता शर्मशार हुई है। यहां अपने घायल बच्चे के इलाज के लिए एक गरीब लाचार मां जिला अस्पताल के बाहर भीख मांगती नजर आई। जब लाचार मां एसडीएम से मदद की गुहार लगाने उनके ऑफिस पहुंची तो एसडीएम साहब चने खाते रहे, उनके कानों में जूं तक नहीं रेंगा। हालांकि ऑफिस के कर्मचारियों ने मदद के नाम पर पीड़िता को भीख दे दी।

Hathras Mother Seeks Help For Son S Treatment :

मामला हाथरस के लालडिग्गी क्षेत्र का है। जहां एक 8 साल का मासूम बच्चा खुले मै शौच के लिए निकला था। इस दौरान आवारा घूम रहे सुअरों ने उस पर हमला कर दिया और अपने बाड़े में खींच ले गए। मासूम की मां जब तक उसको बचाने पहुंची तब तक सुअरोँ ने उसको काफी घायल कर दिया था। परिजन तत्काल मासूम को जिला अस्पताल लेकर आये, जहा डाक्टरों ने मासूम का इलाज किया। हालत में सुधार ना होने पर डाक्टरों ने बच्चे को अलीगढ ले जाने की सलाह दी।
इलाज के लिए पैसे ना होने की वजह से महिला ने अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन बेबस मां को बेटे के इलाज के लिए भीख मांगनी पड़ी। वहीं उपजिलाधिकारी कार्यालय शिकायत लेकर पहुंची पीड़िता की मदद की बजाए उपजिलाधिकारी चने खाने में मस्त रहे। गरीब मां की आवाज उनके कानों तक नहीं पहुंची, लेकिन उनके अदनीस्थों को तो तरस आ गया और उनके अधिकारी और कर्मचारियों ने मदद के नाम पर भीख दे दी।

हाथरस। यूपी के हाथरस जिले में एक बार फिर मानवता शर्मशार हुई है। यहां अपने घायल बच्चे के इलाज के लिए एक गरीब लाचार मां जिला अस्पताल के बाहर भीख मांगती नजर आई। जब लाचार मां एसडीएम से मदद की गुहार लगाने उनके ऑफिस पहुंची तो एसडीएम साहब चने खाते रहे, उनके कानों में जूं तक नहीं रेंगा। हालांकि ऑफिस के कर्मचारियों ने मदद के नाम पर पीड़िता को भीख दे दी।मामला हाथरस के लालडिग्गी क्षेत्र का है। जहां एक 8 साल का मासूम बच्चा खुले मै शौच के लिए निकला था। इस दौरान आवारा घूम रहे सुअरों ने उस पर हमला कर दिया और अपने बाड़े में खींच ले गए। मासूम की मां जब तक उसको बचाने पहुंची तब तक सुअरोँ ने उसको काफी घायल कर दिया था। परिजन तत्काल मासूम को जिला अस्पताल लेकर आये, जहा डाक्टरों ने मासूम का इलाज किया। हालत में सुधार ना होने पर डाक्टरों ने बच्चे को अलीगढ ले जाने की सलाह दी। इलाज के लिए पैसे ना होने की वजह से महिला ने अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन बेबस मां को बेटे के इलाज के लिए भीख मांगनी पड़ी। वहीं उपजिलाधिकारी कार्यालय शिकायत लेकर पहुंची पीड़िता की मदद की बजाए उपजिलाधिकारी चने खाने में मस्त रहे। गरीब मां की आवाज उनके कानों तक नहीं पहुंची, लेकिन उनके अदनीस्थों को तो तरस आ गया और उनके अधिकारी और कर्मचारियों ने मदद के नाम पर भीख दे दी।