हृदय रोग से बचना है तो इन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग खुद का ध्यान नहीं रख पाते हैं अगर समय रहते जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए तो दिल की बिमारी ठीक हो सकती है। इंडियन मंडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मनोनीत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि जिनमे धूम्रपान, शराब की आदत हो, जिनके आहार में हरी सब्जियों या फल की कमी हो, देर तक एक ही जगह बैठ के काम करने वाले लोगों को दिल की बिमारी जल्दी होने की सम्भावना होती है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान छोड़ने से दिल की बिमारी का ख़तरा बिलकुल कम हो जाता है।




दिल की बीमारी के लक्षण

* सीने में असहज महसूस होना
* दिल संबंधी कोई भी गंभीर समस्या होने से पहले कुछ लोगों को मितली आना, हृदय में जलन, पेट में दर्द होना या फिर पाचन संबंधी दिक्कतें आने लगती हैं
* हाथ में दर्द होना
* कई दिनों तक कफ होना
* पसीना आना
* पैरों में सूजन
* हाथ कमर और गर्दन में दर्द होना
* सांस लेने में दिक्कत होना

दिल की बिमारी के घरेलु उपचार

* कच्चा लहसुन रोज सुबह खली पेट खाने से खून का संचार ठीक रहता है, दिल को मजबूत बनाता है और कोलेस्ट्राल भी कम होता है|
* दिल की बीमारी में सेब के जूस और आंवले के रस का सेवन करना चहिये
* शहद के सेवन से दिल मजबूत होता है इसलिए प्रतिदिन शहद का सेवन अवश्य करना चाहिये
* अनार के रस में 2 चमच्च मिश्री मिला कर हर रोज पीने से दिल मजबूत होता है
* बादाम में फाइबर और विटामिन की भरपूर मात्रा होती है
* खाने में अलसी का तेल प्रयोग करें, अलसी में फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है जिससे भी दिल मजबूत होता है
* छोटी इलाइची और पीपरामूल का चूर्ण घी के साथ खाने से भी दिल की बीमारी दूर होती है
* गाजर के रस में शहद मिला कार सेवन करना चाहिए
* अलसी के पत्ते और सूखे धनिये का काढा पीना चहिये
* दिल को मजबूत बनाने क लिए गुड को देसी घी में मिलाकर नित्य खाने से भी बहुत फायदा होता है|

इन बातों को ध्यान में रख कर दिल की बिमारी से बचा जा सकता है

* गुर्दे और फेफड़ों की कार्यप्रणाली 80 प्रतिशत तक बनाये रखें
* नियमित तौर पर आराम करे दिन में कम से कम 80 कदम जरुर चलें
* हर आहार में 80 ग्राम से ज्यादा कैलोरी ना लें, उच्च फाइबर, कम सैचुरेटेड फैट्स, कम रिफाइंड कर्बोहाईडेट्स और नमक वाला आहार लें
* धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें
* अगर बचाव के लिए एस्प्रिन की सलाह दी गई हो तो 80 एमजी की ही डोज लें और डॉक्टर के कहने पर ही 80 एमजी एटोरवॉस्टाटिन का प्रयोग करें

आस्था सिंह की रिपोर्ट