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Breaking-JMM की बैठकों से हेमंत सोरेन के भाई दुमका से विधायक बसंत सोरेन रहे नादरद, झारखंड में सियासी सरगर्मियां तेज

झारखंड का सियासी पारा इस समय चढ़ा हुआ है। सूबे की सियासत में चल रही उथल-पुथल के बीच लगातार यूपीए विधायकों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेकर रवाना हो गए है। बता दें कि इससे पहले अपनी संख्या बल को देखते हुए प्रतिदिन विधायकों की अटेंडेंस अपने आवास पर लगवा रहे थे।

By संतोष सिंह 
Updated Date

रांची। झारखंड का सियासी पारा इस समय चढ़ा हुआ है। सूबे की सियासत में चल रही उथल-पुथल के बीच लगातार यूपीए विधायकों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेकर रवाना हो गए है। बता दें कि इससे पहले अपनी संख्या बल को देखते हुए प्रतिदिन विधायकों की अटेंडेंस अपने आवास पर लगवा रहे थे।
वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की सदस्यता मामले में फैसले से पूर्व कई तरह की विकल्पों पर चर्चा की गई। चर्चा में मुख्यमंत्री के विकल्प के तौर पर सबसे पहले कल्पना सोरेन का नाम था। इसके बाद शिबू सोरेन, जोबा मांझी, चंपई सोरेन और अंत में प्रमुखता से जिस नाम पर चर्चा की गई, वह था रूपी सोरेन का।

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विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई और दुमका से विधायक बसंत सोरेन, भाभी सीता सोरेन और कई वरिष्ठ जो पार्टी के विधायक हैं, वो कल्पना सोरेन के नाम पर सहमत नहीं थे। नाराज विधायकों का कहना था कि अगर किसी को विकल्प के तौर पर मुख्यमंत्री का पद देना है तो वह ऐसा हो, जो सभी का एक बराबर से ध्यान रखने वाला होे।

तभी एकजुट रहेंगे यूपीए विधायक

बसंत सोरेन और कई वरिष्ठ विधायकों ने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए केवल शिबू सोरेन की पत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के नाम पर ही सहमति दी। विधायकों का तर्क यह था कि इससे सभी यूपीए गठबंधन के लोग एकजुट भी रहेंगे और चुकी रूपी सोरेन को लोग राजमाता के रूप में संबोधित करते हैं तो जनता के बीच भी यह मैसेज जाएगा कि मुख्यमंत्री ने बिहार में जैसा हुआ था कि लालू यादव ने सत्ता अपनी पत्नी राबड़ी देवी के हाथों में सौंपी थी, इसके बजाय मुख्यमंत्री ने सत्ता की चाबी अपनी मां के हाथ में सौंप दी।

रूपी सोरेन को सत्ता की कमान देने की मांग

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सूत्रों ने बताया कि बसंत सोरेन का सीधा तर्क था कि मुख्यमंत्री को विकल्प के तौर पर किसी को भी अगर सत्ता की कमान सौंपनी है तो वह केवल और केवल विकल्प होंगी हमारी मां रूपी सोरेन। बता दें कि लगातार तीन बार की बैठक से बसंत सोरेन नदारद रहे। जो हमें जानकारी मिली है कि जब सियासी सरगर्मियां तेज थीं और लगातार मुख्यमंत्री अपने विधायकों को एकजुट करने में लगे हुए थे।

हेमंत सोरेन ने जताई सहमति!
उस वक्त उनके ही भाई इस बैठक से खुद को दूर कर रखे थे। हालांकि हमारे विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि जब हेमंत भी भाई बसंत और बाकी लोगों की राय पर सहमति जाहिर किए, तब आज मुख्यमंत्री के छोटे भाई और दुमका से विधायक बसंत सोरेन भी मुख्यमंत्री के साथ रवाना हुए हैं।

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