ऑनलाइन सेल पर खत्म हो सकती है छूट, सरकार रखेगी ऐसी पॉलिसी पर नज़र

online shopping,ऑनलाइन सेल पर खत्म हो सकती है छूट, सरकार
ऑनलाइन सेल पर खत्म हो सकती है छूट, सरकार रखेगी ऐसी पॉलिसी पर नज़र

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग पर भारी छूट का लाभ उठाने वाले ग्राहकों के लिए यह थोड़ा बुरी खबर साबित हो सकती है। दरअसल, अब सरकार ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन शॉपिंग प्लैटफॉर्म्स की ओर से दिए जाने वाले भारी डिस्काउंट पर नजर बनाए रखने की तैयारी कर रही है। सोमवार को सरकार ने ई-कॉमर्स पॉलिसी से संबन्धित एक प्रस्ताव दिया है जिसमें इस तरह की छूट को एक निश्चित तारीख के बाद रोक लगाने पर विचार किया जा रहा है।

Here Is The Reason Why Cheap Online Shopping May Soon End :

तेजी से ग्रोथ कर रहे ऑनलाइन रिटेल सेक्टर को लेकर यह अपनी तरह का पहला प्रस्ताव है। ऐसे में एक ऐसा विधेयक तैयार किए जाने की बात हो रही है जिसमें फूड डिलिवरी साइट्स जैसे स्विगि और ज़ोमैटो को भी शामिल किए जाने की बात कही है। ऑनलाइन सर्विस ऐग्रिगेटर्स जैसे अर्बन क्लैप और फाइनैंशल सर्विसेज एवं पेमेंट ऐप पेटीएम और पॉलिसीबाजार को भी इसके तहत लाने का प्रस्ताव दिया गया है।

इस वजह से लिया जाएगा यह फैसला

  • कंज्यूमर प्रॉटेक्शन और ग्रीवेंस रीड्रेसल, एफडीआई, डेटा की लोकल स्टोरेज, लघु एवं मध्यम उद्योगों के विलय और अधिग्रहण के मसलों की बात भी इसमें कही गई है।
  • इसके लिए आम लोगों की भी राय ली जाएगी।
  • इस विधेयक में सेक्टर के रेग्युलेशन के लिए एक रेग्युलेटर की नियुक्ति की भी बात कही गई है।
  • भारत में ई-कॉमर्स का मार्केट 25 अरब डॉलर का है, जबकि अगले दशक में इसके 200 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
  • इस सेक्टर में बढ़ती ऐक्टिविटी के चलते दिग्गज ग्लोबल फाइनैंशल और रिटेल प्लेयर्स वॉलमार्ट, सॉफ्टबैंक, अलीबाबा, टाइगर ग्लोबल और टेंसेंट जैसी कंपनियों ने भारत में निवेश का फैसला लिया है।
  • ड्राफ्ट पॉलिसी में कई खामियों पर लगाम लगाने का भी प्रस्ताव है।
  • ड्राफ्ट में न केवल ऐमजॉन और फ्लिपकॉर्ट जैसे मार्केटप्लेस बल्कि ग्रुप की कंपनियों पर भी बंदिशों की बात कही गई है।
नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग पर भारी छूट का लाभ उठाने वाले ग्राहकों के लिए यह थोड़ा बुरी खबर साबित हो सकती है। दरअसल, अब सरकार ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन शॉपिंग प्लैटफॉर्म्स की ओर से दिए जाने वाले भारी डिस्काउंट पर नजर बनाए रखने की तैयारी कर रही है। सोमवार को सरकार ने ई-कॉमर्स पॉलिसी से संबन्धित एक प्रस्ताव दिया है जिसमें इस तरह की छूट को एक निश्चित तारीख के बाद रोक लगाने पर विचार किया जा रहा है।तेजी से ग्रोथ कर रहे ऑनलाइन रिटेल सेक्टर को लेकर यह अपनी तरह का पहला प्रस्ताव है। ऐसे में एक ऐसा विधेयक तैयार किए जाने की बात हो रही है जिसमें फूड डिलिवरी साइट्स जैसे स्विगि और ज़ोमैटो को भी शामिल किए जाने की बात कही है। ऑनलाइन सर्विस ऐग्रिगेटर्स जैसे अर्बन क्लैप और फाइनैंशल सर्विसेज एवं पेमेंट ऐप पेटीएम और पॉलिसीबाजार को भी इसके तहत लाने का प्रस्ताव दिया गया है।इस वजह से लिया जाएगा यह फैसला
  • कंज्यूमर प्रॉटेक्शन और ग्रीवेंस रीड्रेसल, एफडीआई, डेटा की लोकल स्टोरेज, लघु एवं मध्यम उद्योगों के विलय और अधिग्रहण के मसलों की बात भी इसमें कही गई है।
  • इसके लिए आम लोगों की भी राय ली जाएगी।
  • इस विधेयक में सेक्टर के रेग्युलेशन के लिए एक रेग्युलेटर की नियुक्ति की भी बात कही गई है।
  • भारत में ई-कॉमर्स का मार्केट 25 अरब डॉलर का है, जबकि अगले दशक में इसके 200 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
  • इस सेक्टर में बढ़ती ऐक्टिविटी के चलते दिग्गज ग्लोबल फाइनैंशल और रिटेल प्लेयर्स वॉलमार्ट, सॉफ्टबैंक, अलीबाबा, टाइगर ग्लोबल और टेंसेंट जैसी कंपनियों ने भारत में निवेश का फैसला लिया है।
  • ड्राफ्ट पॉलिसी में कई खामियों पर लगाम लगाने का भी प्रस्ताव है।
  • ड्राफ्ट में न केवल ऐमजॉन और फ्लिपकॉर्ट जैसे मार्केटप्लेस बल्कि ग्रुप की कंपनियों पर भी बंदिशों की बात कही गई है।