पीरियड्स के दौरान महिलाओं के उत्पीड़न को रोकेगा ये कानून

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पीरियड्स के दौरान महिलाओं के उत्पीड़न को रोकेगा ये कानून

नई दिल्ली। हिन्दू संस्कृति में महावारी यानी पीरियड्स के दौरान महिलाओं के लिए कई कार्य करने वर्जित हैं। मान्यताओं के अनुसार महावारी के दौरान महिलाएं अशुद्ध होती हैं, इसलिए उनका पूजा घर, रसोई घर और घर में सबके साथ उठने बैठने की मनाही होती है। आज भी ये मान्यताएं कुछ हद तक मानी जातीं हैं।

नेपाल भी एक ऐसा देश है जहां कुछ इलाकों में इस तरह की मान्यताओं को सख्ती से लागू किया जाता है। इन इलाकों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को घर से बाहर रखा जाता है। उन्हें जानवरों को रखने के लिए बनाई गई झोपड़ियों या घर से दूर किसी झोपड़ी में रहना पड़ता है। जिससे महिलाओं को तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार इन परिस्थितियों में महिलाओं और युवतियों की जान भी चली जाती है।

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नेपाल सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए महिलाओं के साथ पीरियड्स के दौरान मान्यताओं के नाम पर होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए नया कानून बनाया है। जिसके तहत महिलाओं को पीरियड्स के दौरान घर से बाहर निकालने को आपराधिक कृत्य की श्रेणी में माना जाएगा। हालांकि इस कानून के तहत महिलाओं को भी कुछ बातों का ध्यान रखने की बात कही गई है।

नेपाल सरकार ने यह कानून पिछले महीने एक 19 वर्षीय युवती की इसी परंपरा के तहत हुई मौत के कारण बनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक युवती के परिजनों ने पीरियड्स के चलते उसे घर से बाहर सोने के लिए वाध्य किया था। जहां एक सांप ने उसे काट लिया जिसके चलते उसकी मौत हो गई। ऐसा ही एक मामला गत् वर्ष दिसंबर में सामने आया था जब एक 15 वर्षीय युवती को घरवालों ने ही घर के बाहर बनी एक कोठरी में सोने को कहा था। सर्दी के चलते युवती ने कोठरी में रात बिताने के लिए आग जला ली। कोठरी में हवा के बाहर निकलने के रास्ते बंद होने के चलते युवती का दम घुट गया और सुबह उसका शव बरामद हुआ।

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महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए इस कानून के तहत महिलाओं को पीरियड्स के दौरान घर से बाहर निकाले जाने की शिकायत मिलने पर दोषी को तीन महीने जेल की सजा और 3000 नेपाली रुपए का अर्थदंड भुगतना होगा। नेपाल सरकार ने इस कानून के साथ एसिड अटैक और हिन्दू प्रथा के तहत आने वाली दहेज प्रथा को लेकर भी कानून लागू किया है।

नेपाल सरकार ने इस नए कानून को तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया है। सरकार का कहना है कि पहले सरकार इन कानूनों को लेकर जनता में जागरुकता लाएगी। जिससे की इन कानूनों को लेकर लोगों को जानकारी हो सके। इसके बाद महिला सुरक्षा कानून को अगले साल से लागू किया जाएगा।

नेपाली संसद ने भी इस कानून का स्वागत करते हुए कहा कि कानून के साथ साथ इन विषयों को लेकर शिक्षा के माध्यम से जागरुकता लाने की जरूरत है।

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