वाह रे यूपी पुलिस! 90 दिन की जांच 21 साल तक नहीं हुई पूरी, कोर्ट ने लगाई फटकार

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वाह रे यूपी पुलिस! 90 दिन की जांच 21 साल तक नहीं हुई पूरी, कोर्ट ने लगाई फटकार

High Court Directs Up Police To Audit All The Police Stations In State

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस अपने कारनामों को लेकर अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है। इस बार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 21 साल पुराने एक मामले की सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, सीतापुर जिले में एक मामले की जांच, जो 90 दिनों मे पूरी होनी थी, उसे पुलिस 21 साल बाद भी पूरा नहीं कर सकी। नतीजा यह निकला कि आरोपी सरकारी नौकरी से निलम्बित हुआ, सस्पेंड रहते ही रिटायर भी हो गया और उसे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ नहीं मिले।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए गृह सचिव, डीजीपी और आईजी जोन-लखनऊ को प्रदेश के सभी थानों का ऑडिट करवाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जांच में देरी कर वादी, पीड़ित व आरोपितों को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए सीतापुर पुलिस पर पचास हजार रुपये का हर्जाना भी ठोंका है। यह रकम जांच में देरी के जिम्मेदार अफसरों के वेतन से काटकर याची को दी जाएगी।

ये है पूरा मामला-

सीतापुर जिले के मिश्रिख थाना क्षेत्र में 21 साल पहले डकैती का एक मामला दर्ज हुआ था। हैरत की बात यह है कि अभी तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले में नामजद चतुर्भुज ने 2005 में याचिका दायर कर कोर्ट से मांग की थी कि जांच पूरी कर रिपोर्ट अदालत में दाखिल करवाई जाए। यह याचिका साल 2010 में पैरवी के अभाव में खारिज हो गई। इसके बाद याची ने याचिका खारिज करने के आदेश को रिकॉल करने की प्रार्थना की।

कोर्ट ने अर्जी स्वीकार कर एसओ मिश्रिख को तलब किया था। एसओ मिश्रिख बृजेश कुमार राय की ओर से हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया गया कि मामले की केस डायरी तो 11 वर्ष पहले ही गायब हो चुकी है। 19 सितंबर 2007 को तत्कालीन एसओ, मिश्रिख ने सिपाही कृष्णलाल प्रजापति को इसका जिम्मेदार मानते हुए 15 दिनों का वेतन काटने का भी आदेश दिया था।

जस्टिस अजय लाम्बा की बेंच ने हैरानी जताई कि 11 साल में फाइल की दूसरी कॉपी बनाने का कोई प्रयास ही नहीं किया गया। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से कटौती कर याची को 50 हजार रुपये दिलवाने व सभी थानों का ऑडिट करवाने का आदेश दे दिया।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस अपने कारनामों को लेकर अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है। इस बार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 21 साल पुराने एक मामले की सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, सीतापुर जिले में एक मामले की जांच, जो 90 दिनों मे पूरी होनी थी, उसे पुलिस 21 साल बाद भी पूरा नहीं कर सकी। नतीजा यह निकला कि आरोपी सरकारी नौकरी से निलम्बित हुआ, सस्पेंड रहते ही रिटायर भी हो गया…