हाई कोर्ट ने Tik-Tok पर लगे बैन को हटाया

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TIK TOK Anniversary: कुछ ऐसा रहा TIKTOK का एक साल का सफर

नई दिल्ली। लोकप्रिय वीडियो क्रिएटिंग और शेयरिंग ऐप टिक-टॉक को मद्रास हाई कोर्ट द्वारा चार अप्रैल को बैन का आर्डर दिया गया था। इस बैन के पीछे कारण दिया गया था की यह ऐप पोर्नोग्राफी और साइबरबुली को बढ़वा दे रही है। इसके बाद, Apple और Google ने अपने-अपने प्ले-स्टोर से इन ऐप को रिमूव कर दिया था। अब, इस केस में एक नया मोड़ आया है, मद्रास हाई कोर्ट ने इस प्रतिबन्ध को हटा दिया है।

High Court Removed The Ban On Tik Tok :

दरअसल, TIK-TOK को प्रतिबंधित करने के पीछे का कारण यह रहा था की इस ऐप के खिलाफ याचिका दायर किया गयी थी। इस याचिका में कहा गया था की इस ऐप में हमारी संस्कृति को अपमानित किया जा रह है। इसी के साथ ऐप में कंटेंट के सब्जेक्ट को लेकर भी कुछ परेशानी थी। TikTok पर यह आरोप भी लगाया गया था।

साथ ही TIK-TOK अपने यूजर्स की प्राइवेसी पॉलिसी का उल्लंघन भी कर रहा है। इससे ऐप को इस्तेमाल करने वाले काम उनर के बछ्कों पर गलत असर पड़ रहा था। इस याचिका में एक उदाहरण भी दिया गया था जिसके मुताबिक, कुछ बच्चों ने ऐप के कारण आत्महत्या कर ली। इसमें दावा किया गया था कि इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले बच्चे सुरक्षित नहीं हैं।

नई दिल्ली। लोकप्रिय वीडियो क्रिएटिंग और शेयरिंग ऐप टिक-टॉक को मद्रास हाई कोर्ट द्वारा चार अप्रैल को बैन का आर्डर दिया गया था। इस बैन के पीछे कारण दिया गया था की यह ऐप पोर्नोग्राफी और साइबरबुली को बढ़वा दे रही है। इसके बाद, Apple और Google ने अपने-अपने प्ले-स्टोर से इन ऐप को रिमूव कर दिया था। अब, इस केस में एक नया मोड़ आया है, मद्रास हाई कोर्ट ने इस प्रतिबन्ध को हटा दिया है। दरअसल, TIK-TOK को प्रतिबंधित करने के पीछे का कारण यह रहा था की इस ऐप के खिलाफ याचिका दायर किया गयी थी। इस याचिका में कहा गया था की इस ऐप में हमारी संस्कृति को अपमानित किया जा रह है। इसी के साथ ऐप में कंटेंट के सब्जेक्ट को लेकर भी कुछ परेशानी थी। TikTok पर यह आरोप भी लगाया गया था। साथ ही TIK-TOK अपने यूजर्स की प्राइवेसी पॉलिसी का उल्लंघन भी कर रहा है। इससे ऐप को इस्तेमाल करने वाले काम उनर के बछ्कों पर गलत असर पड़ रहा था। इस याचिका में एक उदाहरण भी दिया गया था जिसके मुताबिक, कुछ बच्चों ने ऐप के कारण आत्महत्या कर ली। इसमें दावा किया गया था कि इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले बच्चे सुरक्षित नहीं हैं।