हाईकोर्ट का फैसला, आपराधिक केस छिपाकर नहीं बन सकते सिपाही अथवा दरोगा

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि कोई भी अभ्यर्थी फार्म भरते समय मुकदमा दर्ज होने की बात फार्म में छिपाता है तो वह सिपाही अथवा दरोगा में भर्ती नहीं हो सकता। कोर्ट ने प्रदेश सरकार की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है। एकल जज के आदेश को सरकार ने विशेष अपील दायर कर चुनौती दी थी। एकल जज ने याची राजीव कुमार की याचिका पर आदेश दिया था कि पुलिस भर्ती बोर्ड सिपाही के पद पर उसे ट्रेनिंग पर भेजे तथा उसकी नियुक्ति उसके विरुद्ध चल रहे आपराधिक मुकदमे के निर्णय के अधीन होगी।



इस आदेश को प्रदेश सरकार के पुलिस विभाग ने दो जजों के समक्ष विशेष अपील मे चुनौती दी थी। सरकार के वकील रामानंद पाण्डेय का तर्क था कि याची ने सिपाही पद के लिए आवेदन किया। आवेदन के समय उसने जान बूझकर इस तय को छिपाया कि उसके खिलाफ कोई अपराधिक केस दर्ज है। फार्म को सही मानते हुए चयन प्रक्रिया में उसे शामिल किया गया तथा उसका चयन भी हो गया। चयन के बाद चरित्र सत्यापन मे यह बात सामने उभर कर आयी कि याची के खिलाफ पुलिस पार्टी पर हमला करने का मुकदमा बिहार के गया जिले में दर्ज है और उस केस में आरोप पत्र भी दाखिल है।



परन्तु याची ने किसी भी स्तर पर इन सब तयों का जानबूझकर खुलासा नहीं किया, ताकि उसकी पुलिस मे भर्ती हो जाए। दो जजों की पीठ ने सरकार की अपील को मंजूर कर लिया है तथा एकल जज के आदेश को रद कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची ने न केवल तय को छिपाया, बल्कि झूठ भी बोला। ऐसे में मुकदमा दर्ज होने का तय छिपाकर आवेदन करने वालों को सिपाही अथवा दरोगा पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती ।