महिलाओं के निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन का मामला, एससी-एसटी आयोग ने पुलिस को दे दी क्लीनचिट

नोएडा: ग्रेटर नोएडा के दनकौर के पुलिस स्टेशन के सामने तीन दिन पहले एक परिवार पूरा निर्वस्त्र हो गया। इस हाईवोल्टेज ड्रामे में तीन महिलाएं और दो पुरूष शामिल थे। इस घटना को लेकर एससी-एसटी आयोग ने प्रशासन को नोटिस भेजा गया था जिस पर अनुसूचित जाति आयोग ने मामले में दनकौर पुलिस को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस को हरी झंडी देने के साथ ही आयोग ने दलित परिवार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी निर्देश दिया है।

अनुसूचित जाति आयोग के निदेशक कन्हैया लाल ने कहा कि वह जांच रिपोर्ट अध्यक्ष को सौपेंगे। उपाध्यक्ष मुकेश सिद्धार्थ शुक्रवार दोपहर दलित परिवार के साथ हुई वारदात की जांच करने दनकौर पहुंचे। जांच के बाद उन्होंने कहा दलित परिवार के प्रदर्शन पर आयोग खेद व्यक्त करता है। जिस किसी ने भी महिलाओं के कपड़े फाड़े हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आयोग के उपाध्यक्ष ने सुनील गौतम द्वारा दर्ज कराई गई लूट की घटना को भी फर्जी बताया। सात अन्वेषक कस्बे में भेजकर मामले की जांच कराई थी। स्वयं मौके पर जाकर मामले की जांच की। जांच के बाद आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि दलित परिवार के सदस्यों के कपड़े पुलिस ने नहीं फाड़े, बल्कि स्वयं परिवार के लोगों ने ही फाड़े थे।

गौरतलब है कि एक परिवार के पांच सदस्यों ने जमीन विवाद के मामले में पुलिस में सुनवाई नहीं होने पर निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने जब इन लोगों को रोका तो परिवार के लोग पुलिस के साथ हाथापाई करने लगे। खबरों के मुताबिक परिवार वालों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि दलित होने के कारण पुलिस उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं कर रही है। डेढ़ घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

सुनील नाम के व्यक्ति ने बताया कि गांव में उसकी आठ बीघा जमीन है। गांव के ही महावीर ने उसकी करीब एक बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा है। तीन दिन पहले उसने इस मामले में थाने में शिकायत की थी। सुनील का कहना था कि अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई और आरोपी पर भी कार्रवाई नहीं हुई। इस कारण परिवार के लोग निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन करने को मजबूर हुए।

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