18 दिसंबर को होगा हिमाचल का फैसला

चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा दिया है। वहां 9 नवंबर को सभी 68 सीटों पर वोट डाले जाएंगे और नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे। भारतीय जनता पार्टी को पूरी उम्मीद है कि इस बार एंटी-इनकमबेंशी फैक्टर और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का लाभ उठाते हुए पहाड़ों में कमल खिलाएंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सबसे आगे चल रहे हैं। चुनावी वर्ष होने की वजह से भाजपा की केंद्र सरकार भी पहले से ही हिमाचल प्रदेश पर मेहरबान रही है। माना जा रहा है कि हिमाचल के लोग इसका फायदा भाजपा को पहुंचा सकते हैं। वैसे भी 1990 के बाद से हिमाचल प्रदेश में हर पांच साल पर सरकार बदलते रहने का इतिहास रहा है।

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कांग्रेस मुक्त भारत के अभियान पर चल रही नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी इस चुनाव में भी जीत हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी एक किए हुए है। केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ इन चार चेहरों पर हिमाचल प्रदेश में भाजपा को जीत सुनिश्चित कराने का दारोमदार टिका हुआ है।

जगत प्रकाश नड्डा: जे पी नड्डा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हैं। 57 साल के नड्डा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। उनका लालन-पालन और प्रारंभिक शिक्षा बिहार की राजधानी पटना में हुई। वहीं के प्रसिद्ध पटना यूनिवर्सिटी से इन्होंने बीए की डिग्री ली। इसके बाद हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से इन्होंने एलएलबी किया। नड्डा सबसे पहले 1993 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए।

सतपाल सिंह सट्टी: सतपाल सिंह वर्तमान में हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह तीसरी बार प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने हैं। इससे पहले साल 2011 में वो पहली बार प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने थे। बतौर प्रदेश अध्यक्ष सट्टी का कार्यकाल निर्विवाद और संतोषजनक रहा है।

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जयराम ठाकुर: जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। 52 साल के ठाकुर राजपूत समुदाय से आते हैं। वो पहले भी भाजपा की सरकार में मंत्री रह चिके हैं। मंडी विधानसभा से चुनाव जीतते रहे हैं। संगठन से लेकर आम जनता तक इनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

अजय जामवाल: मंडी जिले के निवासी अजय जामवाल संघ के नेता हैं। संघ प्रचारक रहे हैं। फिलहाल उत्तर-पूर्वी राज्यों के जनरल सेक्रेटरी हैं। जामवाल बूथ लेवेल तक भाजपा और आरएसएस के बीच तालमेल बैठाने में माहिर माने जाते हैं। जामवाल ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में पंजाब में अहम भूमिका निभाई थी।