जानिए कौन है पूर्वोत्तर में भाजपा की सफलता के नायक हिमंत बिस्व शर्मा

हिमंत बिस्व शर्मा, Himanta Biswa Sarma
जानिए कौन है पूर्वोत्तर में भाजपा की सफलता के नायक हिमंत बिस्व शर्मा

नई दिल्ली। आपने सुना होगा कि राहुल गांधी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलने की अपेक्षा अपने कुत्तों के साथ समय बिताना ज्यादा पसंद करते हैं। ये खुलासा साल 2014 में असम की तरूण गगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे बागी विधायक हिमंत बिस्व शर्मा ने किया था। हिमंत बिश्व शर्मा के उस एक ट्वीट ने राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल लाने का काम किया था, क्योंकि वह दौर कांग्रेस के लिए बहुत ही बुरा था। कांग्रेस लोकसभा चुनावों में बुरी तरह से हारी थी और पार्टी के कार्यकर्ताओं में निराशा घर कर रही थी।

उस समय तक हिमंत बिस्व शर्मा भले ही असम की राजनीति में एक बड़ा नाम और तेजतर्रार मंत्री के रूप में पहचान रखते आए हों, लेकिन कांग्रेस में एक बागी के रूप में उन्हें जो नई पहचान मिली उसने आज हिमंत बिस्व शर्मा को पूर्वोत्तर की राजनीति के केन्द्र में लाकर खड़ा कर दिया है। कांग्रेस का वही आज पूर्वोत्तर में भाजपा की कामयाबी के नायक के रूप में देखा जा रहा है।

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उस दौर में हिमंत बिस्व शर्मा ने अपने ​राजनीतिक करियर को दांव पर लगाकर असम के मुख्यमंत्री तरुण गगोई से दुश्मनी लेने के बाद पार्टी के भावी राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भी बयानबाजी कर डाली थी। किसी को अंदाजा तक नहीं था कि जो आदमी इतनी बड़ी ताकत से भिड़ रहा है, उसका भविष्य क्या होगा? जुलाई 2014 में मंत्री पद से इस्तीफा, फिर 2015 में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर हिमंत बिस्व शर्मा ने अपने तेवर जग जाहिर कर दिए थे। इस दौरान उन पर भाजपा से करीबी के आरोप भी लगे, जो कुछ समय बाद सही साबित हुए जब उन्होंने दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

कहते हैं राजनीति में कौन सा गणित फिट हो जाए ये किसी को नहीं पता। फिर चेहरा हिमंत बिस्व शर्मा जैसा हो तो उसके कहने ही क्या? हिमंत बिश्व शर्मा की राजनीतिक क्षमताओं से उनके विरोधी ज्यादा अच्छी तरह परचित थे। जिन्हें हिमंत की ईमानदार छवि और फटाफट फैसले लेने की क्षमताओं के साथ उनकी लोकप्रियता का पूरा भान था। एक ऐसा नेता जिसने जनता के बीच एक मजबूत साख बनाई, जिसे चुनौती देना किसी के बस की बात नहीं थी। शायद ये बात दस सालों तक हिमंत बिस्व शर्मा पर विश्वास बनाए रखने वाले तरुण गगोई नहीं जानते थे, इसीलिए पुत्रमोह में फंसकर उन्होंने अपने ही विश्वासपात्र को अपना दुश्मन बना लिया।

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हिमंत बिस्व शर्मा की बगावत की शुरूआत का वही दौर था जब कांग्रेस मुक्त भारत के मिशन के साथ तेजी से आगे बढ़ती भाजपा बहुमत के साथ केन्द्र की सत्ता में काबिज होने के बाद पूर्वोत्तर भारत में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने की रणनीति तैयार कर रही थी। भाजपा और हिमंत बिस्व शर्मा मानो एक दूसरे की जरूरत थे और किसी दैवीय शक्ति ने दोनों को मिला दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हिमंत बिश्व शर्मा के तेवरों को देखते हुए उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई और मिशन पूर्वोत्तर में भाजपा नेता के रूप में उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंप दी।

पूर्वोत्तर की राजनीति और स्थानीय कांग्रेसी नेतृत्व की हर चाल से बाकिफ हिमंत बिस्व शर्मा ने 2016 के असम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की ईंट से ईंट बजाने का काम किया।नतीजों में भाजपा ने असम में पहली बार अपनी सरकार बनाई और 126 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस मात्र 26 सीटों पर सिमट कर रह गई, उसे 50 सीटों का नुकसान हुआ। हिमंत बिस्व शर्मा ने चुनाव से पहले ही राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा था कि वह सत्तारूढ़ कांग्रेस को 25 से ज्यादा सीटें नहीं जीतने देंगे।

गगोई सरकार में स्वास्थ मंत्री रहते हिमंत बिस्व शर्मा ने जिस तरह से स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त किया, नए मेडिकल कॉलेजों को शुरू करवाया उसके लिए उनकी प्रशंसा होती है। इसके बाद शिक्षामंत्री के रूप में भी हिमंत बिश्व शर्मा ने टीईटी के माध्यम से 50 हजार शिक्षकों की भर्ती कर असम की शिक्षा ​व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए उन्होंने साक्षात्कार की प्रक्रिया को खत्म कर दिया, जिसके लिए पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी उनकी सराहना हुई।

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हिमंत बिस्व शर्मा की जिन क्षमताओं की अनदेखी कांग्रेस ने की थी, उन्हीं क्षमताओं का लाभ भाजपा ने उठाया। भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीति को ध्यान में रखते हुए पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन (नेडा- NEDA) बनाया। जिसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों में कांग्रेस विरोधी विचारधारा वाले तमाम छोटे और आदिवासी राजनीतिक दलों को इकट्ठा किया गया। इस गठबंधन को बड़ा और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई, पूर्वोत्तर को समझने वाले हिमंत बिश्व शर्मा को। जिनके नेतृत्व में नेडा एक के बाद एक पूर्वोत्तर के 8 में से 5 राज्यों में सरकारें स्थापित कर चुका है। जबकि उम्मीद की जा रही है कि नागालैंड में चुनाव से पूर्व नेडा से अलग हुई नागालैंड पीपुल्स फ्रंट एक बार फिर गठबंधन में आकर भाजपा की मदद से सरकार बनाने का फैसला करेगी। जिसके लिए बातचीत का दौर जारी है।

राजनीति एक गंभीर विषय है, जिसे समझना जितना आसान लगता है वास्तविकता में यह विषय उतना ही गूढ़ है। असम कांग्रेस के लिए जो हिमंत बिस्व शर्मा बागी थे, वह बागी आज पूरे पूर्वोत्तर भारत में कांग्रेस पर अकेले ही भारी पड़ रहे हैं। ताजा परिणामों में दो राज्यों में कांग्रेस अपना खाता तक खोलने में नाकाम रही है।

नई दिल्ली। आपने सुना होगा कि राहुल गांधी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलने की अपेक्षा अपने कुत्तों के साथ समय बिताना ज्यादा पसंद करते हैं। ये खुलासा साल 2014 में असम की तरूण गगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे बागी विधायक हिमंत बिस्व शर्मा ने किया था। हिमंत बिश्व शर्मा के उस एक ट्वीट ने राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल लाने का काम किया था, क्योंकि वह दौर कांग्रेस के लिए बहुत ही बुरा था। कांग्रेस लोकसभा…
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