हिंदी दिवस विशेष, हर साल 10 लाख छात्र हिन्दी में होते हैं फेल

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हिंदी दिवस विशेष, हर साल 10 लाख छात्र हिन्दी में होते हैं फेल

लखनऊ। देश-दुनिया में हिंदी का मान बढ़ाने वाले प्रदेश में ही हिन्दी का बुरा हाल है। अकेले यूपी बोर्ड में ही हर साल 10 लाख के आसपास छात्र सिर्फ हिंदी में फेल हो जाते हैं। यूपी की टाप यूनिवर्सिटीज का हाल यह है कि हिंदी में दाखिला लेने तक के लिए छात्र नहीं आ रहे हैं। प्रदेश के मिशनरी स्कूलों में तो बच्चों पर हिंदी में बात करने पर भी प्रतिबंध है।

Day Special Every Year 10 Lakh Students Fail :

उत्तरप्रदेश में हाईस्कूल और इंटर में हिन्दी विषय की बात करें तो विज्ञान और गणित से ज्यादा छात्रों के लिए हिंदी मुश्किल विषय रहा है। 2018 की यूपी बोर्ड परीक्षा में 11 लाख छात्र-छात्राएं सिर्फ हिन्दी में फेल हुए थे। 2018 में 10वीं की परीक्षा में 30,28,767 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें 7,80,582 छात्र हिंदी में फेल हो गए थे जबकि 12वीं की परीक्षा में 26,04,093 छात्र शामिल हुए थे। इनमें 3,38,776 हिंदी में फेल हो गए थे। वहीं, 2019 की यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में 9,98,250 परीक्षार्थी हिंदी में फेल हो गए। विशेषज्ञ बताते हैं कि हिंदी की उपेक्षा इसलिए हो रही है क्योंकि तकनीकी, मेडिकल और प्रबंधन आदि की पुस्तकें हिंदी में मौजूद नहीं है। साथ ही उनकी सारी परीक्षाएं भी अंग्रेजी माध्यम से होती हैं।

इसलिए मनाया जाता है हिन्दी दिवस
दरअसल 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया था कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राजभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।

लखनऊ। देश-दुनिया में हिंदी का मान बढ़ाने वाले प्रदेश में ही हिन्दी का बुरा हाल है। अकेले यूपी बोर्ड में ही हर साल 10 लाख के आसपास छात्र सिर्फ हिंदी में फेल हो जाते हैं। यूपी की टाप यूनिवर्सिटीज का हाल यह है कि हिंदी में दाखिला लेने तक के लिए छात्र नहीं आ रहे हैं। प्रदेश के मिशनरी स्कूलों में तो बच्चों पर हिंदी में बात करने पर भी प्रतिबंध है। उत्तरप्रदेश में हाईस्कूल और इंटर में हिन्दी विषय की बात करें तो विज्ञान और गणित से ज्यादा छात्रों के लिए हिंदी मुश्किल विषय रहा है। 2018 की यूपी बोर्ड परीक्षा में 11 लाख छात्र-छात्राएं सिर्फ हिन्दी में फेल हुए थे। 2018 में 10वीं की परीक्षा में 30,28,767 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें 7,80,582 छात्र हिंदी में फेल हो गए थे जबकि 12वीं की परीक्षा में 26,04,093 छात्र शामिल हुए थे। इनमें 3,38,776 हिंदी में फेल हो गए थे। वहीं, 2019 की यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में 9,98,250 परीक्षार्थी हिंदी में फेल हो गए। विशेषज्ञ बताते हैं कि हिंदी की उपेक्षा इसलिए हो रही है क्योंकि तकनीकी, मेडिकल और प्रबंधन आदि की पुस्तकें हिंदी में मौजूद नहीं है। साथ ही उनकी सारी परीक्षाएं भी अंग्रेजी माध्यम से होती हैं। इसलिए मनाया जाता है हिन्दी दिवस दरअसल 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया था कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राजभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।