यहां आज भी जलती चिताओं के बीच होली खेलने आते हैं भगवान भोलेनाथ!

वाराणसी: उत्तर प्रदेश की आद्यात्मिक नगरी वाराणसी में रंगभरी एकादशी के अगले दिन मणिकर्णिका घाट पर साधू संत जलती चिताओं के बीच जमकर होली खेलते हैं। होली खेलने की यह परंपरा आज से नहीं आदि काल से चली आ रही हैं। मान्यता हैं कि इस दिन भगवान भोलेनाथ औघड़दानी के रूप में विराजमान रहते हैं और जलती चिताओं के बीच होली खेलते हैं। चिताओं की भस्म से इस दिन महादेव का शृंगार होता है।




एक बार कैलाश पर्वत पर विराजमान भगवान शिव से माता पार्वती कहने लगी कि प्रभु मुझे अपनी ससुराल ले चलिए तो बाबा विश्वनाथ माता गौरा को रंगभरी एकादशी के दिन काशी ले आये। और यहीं आकर कुछ दिन निवास किया। इसीलिए वाराणसी में रंगभरी एकादशी धूमधाम से मनाई जाती है। भक्त बाबा विश्वनाथ एक साथ होली खेलते हैं। और इसी दिन से वाराणसी में होली खेलने की शुरुआत हो जाती है।

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