होली विशेष: मथुरा में है भक्त प्रहलाद का गांव, यहां जलती होली के बीच से चलकर निकलता है पुजारी

HOLI
होली विशेष: मथुरा में है भक्त प्रहलाद का गांव, यहां जलती होली के बीच से चलकर निकलता है पुजारी

लखनऊ। इस बार सोमवार 9 मार्च को फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन होगा। मथुरा और वृंदावन की होली पूरी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यूपी के मथुरा के पास ही स्थित फालैन को भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रहलाद का गांव माना जाता है। इस गांव में आज भी एक पुजारी होलिका दहन पर जलती हुई होली के बीच से निकलता है, लेकिन आग उसे जलाती नहीं है। फालैन का पुजारी परिवार सदियों से यह परंपरा निभा रहा है। इस आश्चर्यजनक दृश्य को देखने के लिए दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं। इस मौके पर गांव में बहुत बड़ा मेला लगता है।

Holi Special Devotee Prahladas Village Is In Mathura The Priest Walks Out Of The Middle Of The Burning Holi Here :

होलिका दहन की इस परंपरा के लिए पुजारी परिवार के जिस सदस्य को जलती होली से निकलना होता है, वो एक महीने पहले से घर छोड़कर मंदिर में रहने लगता है। वहीं रहकर वह पूजा-पाठ, मंत्र जाप और उपवास करता है। इसके बाद ही वह जलती हुई होलिका के बीच से निकलता है। इस बार मोनू नामक पुजारी जलती हुई होली के बीच में निकलेगा। हर साल होली पर जोखिम भरा ये काम मोनू के परिवार से कोई एक सदस्य करता है। ग्राम पंचायत फालैन के समाज सेवक प्रेमसुख कौशिक के अनुसार होली पर ये चमत्कार देखने के लिए देश-दुनिया से हजारों लोग फालैन गांव पहुंचते हैं। गांव में पुजारी परिवार के 20-30 घर हैं। हर बार होली से पहले पंचायत में ये तय होता है कि इस साल जलती होली में से कौन निकलेगा।

फालैन गांव के भागवत प्रवक्ता संत योगीराज महाराज ने बताया कि यहां होलिका दहन कार्यक्रम भव्य पैमाने पर होता है। होलिका सजाने के लिए आसपास के 5-7 गांवों से लोग कंडे लेकर आते हैं। ऐसे में यहां हजारों कंडे एकट्ठा हो जाते हैं। सभी कंडों से करीब 25 फीट चौड़ी और 8-10 फीट ऊंची होलिका तैयार की जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा पर गांव और आसपास के लोग होलिका पूजन करते हैं। रात में होलिका जलाई जाती है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में पुजारी जलती होली में से निकलते हैं। ये कारनामा कुछ ही देर का होता है। इस साल से पहले मोनू के पिताजी 10 बार जलती होली में से निकल चुके हैं। जलती होली से निकलने वाले पंडा का बाल भी नहीं जलता है। गांव के लोग सभी अतिथियों के खान-पान और रहने की व्यवस्था करते हैं।

जलती होली से निकलने वाला पुजारी एक महीने पहले लोगों के साथ पूरे गांव की परिक्रमा करता है। इसके बाद होली के स्थान की पूजा करता है और प्रहलाद मंदिर में तपस्या करना शुरू कर देता है। पूरा एक महीना फलाहार करता है। इस आयोजन के दौरान जलती होली में से निकलने वाला पुजारी करीब 3 दिन तक सोता भी नहीं है। होली से एक दिन पहले गांव के लोग कंडों की मदद से विशाल होलिका तैयार करते हैं। फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका पूजन किया जाता है और होली जला दी जाती है।

परम्परा के मुताबिक पुजारी की बुआ प्रहलाद कुंड से एक लोटा पानी लेकर आती है और जलती होली में डाल देती है। इससे होलिका शांत हो जाती है। इसके बाद पुजारी प्रहलाद कुंड में स्नान करता है और एक गमछा, माला लेकर भक्त प्रहलाद का ध्यान करते हुए जलती हुई होली से निकल जाता है। आग से निकलने के बाद भी पुजारी के शरीर पर आग की गर्मी का कोई बुरा असर नहीं होता है।

श्री हरि के अनन्य भक्त प्रहलाद का गांव

प्रचलित मान्यता के अनुसार ये गांव दैत्यराज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद का गांव है। पुराने समय में एक संत ने यहां तपस्या की थी। उस समय इस गांव के एक पुजारी परिवार को स्वप्न आया कि एक पेड़ के नीचे मूर्ति दबी हुई है। इस सपने के बाद गांव के पुजारी परिवार के सदस्यों ने संत के मार्गदर्शन में खुदाई की थी। इस खुदाई में भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद की मूर्ति निकली। तब संत ने पुजारी परिवार को ये आशीर्वाद दिया कि हर साल होली पर इस परिवार का जो भी सदस्य पूरी ईमानदारी और आस्था से भक्ति करेगा, उसे भक्त प्रहलाद की विशेष कृपा मिलेगी और वह जलती हुई होली से निकल सकेगा। ऐसा करने के बाद भी उसके शरीर पर आग की गर्मी का कोई असर नहीं होगा। यहां भक्त प्रहलाद का मंदिर है और यहीं एक कुंड भी है।

लखनऊ। इस बार सोमवार 9 मार्च को फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन होगा। मथुरा और वृंदावन की होली पूरी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यूपी के मथुरा के पास ही स्थित फालैन को भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रहलाद का गांव माना जाता है। इस गांव में आज भी एक पुजारी होलिका दहन पर जलती हुई होली के बीच से निकलता है, लेकिन आग उसे जलाती नहीं है। फालैन का पुजारी परिवार सदियों से यह परंपरा निभा रहा है। इस आश्चर्यजनक दृश्य को देखने के लिए दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं। इस मौके पर गांव में बहुत बड़ा मेला लगता है। होलिका दहन की इस परंपरा के लिए पुजारी परिवार के जिस सदस्य को जलती होली से निकलना होता है, वो एक महीने पहले से घर छोड़कर मंदिर में रहने लगता है। वहीं रहकर वह पूजा-पाठ, मंत्र जाप और उपवास करता है। इसके बाद ही वह जलती हुई होलिका के बीच से निकलता है। इस बार मोनू नामक पुजारी जलती हुई होली के बीच में निकलेगा। हर साल होली पर जोखिम भरा ये काम मोनू के परिवार से कोई एक सदस्य करता है। ग्राम पंचायत फालैन के समाज सेवक प्रेमसुख कौशिक के अनुसार होली पर ये चमत्कार देखने के लिए देश-दुनिया से हजारों लोग फालैन गांव पहुंचते हैं। गांव में पुजारी परिवार के 20-30 घर हैं। हर बार होली से पहले पंचायत में ये तय होता है कि इस साल जलती होली में से कौन निकलेगा। फालैन गांव के भागवत प्रवक्ता संत योगीराज महाराज ने बताया कि यहां होलिका दहन कार्यक्रम भव्य पैमाने पर होता है। होलिका सजाने के लिए आसपास के 5-7 गांवों से लोग कंडे लेकर आते हैं। ऐसे में यहां हजारों कंडे एकट्ठा हो जाते हैं। सभी कंडों से करीब 25 फीट चौड़ी और 8-10 फीट ऊंची होलिका तैयार की जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा पर गांव और आसपास के लोग होलिका पूजन करते हैं। रात में होलिका जलाई जाती है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में पुजारी जलती होली में से निकलते हैं। ये कारनामा कुछ ही देर का होता है। इस साल से पहले मोनू के पिताजी 10 बार जलती होली में से निकल चुके हैं। जलती होली से निकलने वाले पंडा का बाल भी नहीं जलता है। गांव के लोग सभी अतिथियों के खान-पान और रहने की व्यवस्था करते हैं। जलती होली से निकलने वाला पुजारी एक महीने पहले लोगों के साथ पूरे गांव की परिक्रमा करता है। इसके बाद होली के स्थान की पूजा करता है और प्रहलाद मंदिर में तपस्या करना शुरू कर देता है। पूरा एक महीना फलाहार करता है। इस आयोजन के दौरान जलती होली में से निकलने वाला पुजारी करीब 3 दिन तक सोता भी नहीं है। होली से एक दिन पहले गांव के लोग कंडों की मदद से विशाल होलिका तैयार करते हैं। फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका पूजन किया जाता है और होली जला दी जाती है। परम्परा के मुताबिक पुजारी की बुआ प्रहलाद कुंड से एक लोटा पानी लेकर आती है और जलती होली में डाल देती है। इससे होलिका शांत हो जाती है। इसके बाद पुजारी प्रहलाद कुंड में स्नान करता है और एक गमछा, माला लेकर भक्त प्रहलाद का ध्यान करते हुए जलती हुई होली से निकल जाता है। आग से निकलने के बाद भी पुजारी के शरीर पर आग की गर्मी का कोई बुरा असर नहीं होता है।

श्री हरि के अनन्य भक्त प्रहलाद का गांव

प्रचलित मान्यता के अनुसार ये गांव दैत्यराज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद का गांव है। पुराने समय में एक संत ने यहां तपस्या की थी। उस समय इस गांव के एक पुजारी परिवार को स्वप्न आया कि एक पेड़ के नीचे मूर्ति दबी हुई है। इस सपने के बाद गांव के पुजारी परिवार के सदस्यों ने संत के मार्गदर्शन में खुदाई की थी। इस खुदाई में भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद की मूर्ति निकली। तब संत ने पुजारी परिवार को ये आशीर्वाद दिया कि हर साल होली पर इस परिवार का जो भी सदस्य पूरी ईमानदारी और आस्था से भक्ति करेगा, उसे भक्त प्रहलाद की विशेष कृपा मिलेगी और वह जलती हुई होली से निकल सकेगा। ऐसा करने के बाद भी उसके शरीर पर आग की गर्मी का कोई असर नहीं होगा। यहां भक्त प्रहलाद का मंदिर है और यहीं एक कुंड भी है।