Holika Dahan 2018: जानें कब है शुभ मुहूर्त, क्या होंगे लाभ

Holika Dahan 2018: जानें कब है शुभ मुहूर्त, क्या होंगे लाभ
Holika Dahan 2018: जानें कब है शुभ मुहूर्त, क्या होंगे लाभ

नई दिल्ली। आज पूरे देश में होली के त्योहार की धूम मची है। आज शाम होलिका दहन किया जाएगा और कल रंगों के साथ इस पर्व का जश्न मनाया जाएगा। शास्त्रों में होलिका दहन की रात को सिद्धि की रात कहा गया है। इसका महत्व महाशिवरात्रि, दीपावली, नवरात्रि की तरह महारात्रि माना गया है।

Holika Dahan 2018 Shubh Muhurt :

इस बार होलिका दहन शाम को 7.40 के बाद किया जाएगा, क्योंकि पूर्णिमा का समय गुरुवार की सुबह 7.53 मिनट से शुरू होकर शुक्रवार को सुबह 6 बजे तक रहेगा, जबकि भद्रा का गुरुवार शाम 6.58 मिनट तक रहेगी। इसलिए शाम 7 बजे के बाद ही होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। होलिका दहन के साथ ही देश की तमाम जगहों पर होली की शुरुआत हो जाएगी।

होलिका मनाने के पीछे एक कहानी है। भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप अपने बेटे से बहुत नफरत करता था। उसने प्रह्लाद पर हजारों हमले करवाए। फिर भी प्रह्लाद सकुशल रहा। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को भेजा। होलिका को वरदान था कि वह आग से नहीं जलेगी।

हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बोला कि वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ जाए। होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में कूद गई। लेकिन हुआ इसका उल्टा। होलिका प्रह्लाद को लेकर जैसे ही आग में गई वह जल गई वह प्रह्लाद बच गए। प्रह्लाद अपने आराध्य विष्णु का नाम जपते हुए आग से बाहर आ गए। तब से होलिका दहन की रीत शुरू हो गई. इसके अगले दिन रंगों का त्योहार मनाया जाता है।

नई दिल्ली। आज पूरे देश में होली के त्योहार की धूम मची है। आज शाम होलिका दहन किया जाएगा और कल रंगों के साथ इस पर्व का जश्न मनाया जाएगा। शास्त्रों में होलिका दहन की रात को सिद्धि की रात कहा गया है। इसका महत्व महाशिवरात्रि, दीपावली, नवरात्रि की तरह महारात्रि माना गया है।इस बार होलिका दहन शाम को 7.40 के बाद किया जाएगा, क्योंकि पूर्णिमा का समय गुरुवार की सुबह 7.53 मिनट से शुरू होकर शुक्रवार को सुबह 6 बजे तक रहेगा, जबकि भद्रा का गुरुवार शाम 6.58 मिनट तक रहेगी। इसलिए शाम 7 बजे के बाद ही होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। होलिका दहन के साथ ही देश की तमाम जगहों पर होली की शुरुआत हो जाएगी।होलिका मनाने के पीछे एक कहानी है। भक्त प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप अपने बेटे से बहुत नफरत करता था। उसने प्रह्लाद पर हजारों हमले करवाए। फिर भी प्रह्लाद सकुशल रहा। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को भेजा। होलिका को वरदान था कि वह आग से नहीं जलेगी।हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बोला कि वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ जाए। होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में कूद गई। लेकिन हुआ इसका उल्टा। होलिका प्रह्लाद को लेकर जैसे ही आग में गई वह जल गई वह प्रह्लाद बच गए। प्रह्लाद अपने आराध्य विष्णु का नाम जपते हुए आग से बाहर आ गए। तब से होलिका दहन की रीत शुरू हो गई. इसके अगले दिन रंगों का त्योहार मनाया जाता है।