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गृहमंत्री ने जम्मू कश्मीर में छह महीने राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव किया पेश, कांग्रेस ने किया विरोध

Home Minister Proposes To Increase Presidents Rule For Six Months In Jammu And Kashmir

By शिव मौर्या 
Updated Date

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का गृह मंत्री अमित शाह ने आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र बहाल रहे, यह बीजेपी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार वहां शांति, कानून का शासन और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ना चाहती है।  गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार को लोकसभा में दो प्रस्ताव लेकर आए। एक प्रस्ताव में उन्होंने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि को बढ़ाने और दूसरे में जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 5 और 9 के तहत जो आरक्षण का प्रावधान है उसमें भी संशोधन करके कुछ और क्षेत्रों को जोड़ने का प्रस्ताव रखा।

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वहीं दोनों प्रस्तावों का एक साथ पेश करने का विरोध कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने किया। इस पर गृहमंत्री ने कहा कि उन्हें अलग-अलग प्रस्ताव पेश करने में कोई परेशानी नहीं है। वह केवल समय बचाना चाहते हैं। इसके बाद दोनों प्रस्ताव एक साथ पेश किये गये। शाह ने पहले जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का प्रसतव रखते हुए कहा कि वहां अभी विधानसभा आस्तित्व में नहीं है। इसलिए मैं विधेयक लेकर आया हूं कि छह माह के लिए राष्ट्रपति शासन बढ़ा दिया जाये।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने जम्मू कश्मीर प्रशासन और सभी राजनीतिक दलों से बात करके निर्णय लिया है कि इस साल के अंत में ही वहां पर चुनाव हो सकेगा। इसके साथ ही अमित शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में कई सालों से पंचायत के चुनाव नहीं कराए जाते थे लेकिन हमारी सरकार ने पिछले साल में वहां चार हजार से अधिक पंचायतों में चुनाव कराये और 40 हजार से अधिक पंच सरपंच आज लोगों की सेवा कर रहे हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि दूसरे प्रस्ताव में जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 5 और 9 के तहत जो आरक्षण का प्रावधान है उसमें संशोधन करके कुछ नए क्षेत्रों को जोड़ने का प्रस्ताव रखा। अमित शाह ने कहा कि जिसके तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों के लोगों के लिए जो आरक्षण है उसी के अंतर्गत अंतराष्ट्रीय सीमा में रहने वालों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

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