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कोरोना का कहर: पिछले दो हफ्ते से भारत में डरावनी रफ्तार, केसेज बढ़ने में सिर्फ ब्राजील से पीछे

Horrific Pace In India For Last Two Weeks Only Behind Brazil In Increasing Cases

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: पिछले दो हफ्ते से भारत में कोरोना की डरावनी रफ्तार, केसेज बढ़ने में सिर्फ ब्राजील से पीछेभारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्‍या ढाई लाख का आंकड़ा पार कर गई है। टोटल केसेज में हम जल्‍द ही यूनाइटेड किंगडम (2.8 लाख मामले) को पीछे छोड़ देंगे। दुनिया में सबसे ज्‍यादा केस अमेरिका में हैं जहां संख्‍या 20 लाख होने वाली है। 7 लाख केसेज के साथ दूसरे नंबर पर ब्राजील है। अगर कोरोना से सबसे ज्‍यादा प्रभावित पांच देशों को देखों तो उनमें से तीन में नए केसेज का ग्रोथ रेट अब 2% से कम रह गया है। मगर भारत और ब्राजील ऐसे हैं जहां अभी 4% से ज्‍यादा के रेट से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। डेली ग्रोथ रेट की तुलना करने पर ऐसा लगता है कि भारत में ही सबसे तेजी से कोरोना के केसेज बढ़ रहे हैं।

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कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र में हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। चीन, जहां से कोरोना पूरी दुनिया में फैला, उससे भी ज्यादा केस महाराष्ट्र में हो चुके हैं। सूबे में कुल मामले 85 हजार से ज्यादा हो चुके हैं, जबकि चीन में यह आंकड़ा 83,040 है। अप्रैल के पहले हफ्ते से ही भारत का ग्रोथ रेट लगातार अमेरिका और ब्रिटेन से ज्‍यादा रहा है। मई के बीच में रूस भी पीछे छूट गया और अब भारत में तेजी से कोरोना केस बढ़ रहे हैं।

यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल और जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी का डेटा दिखाता है कि भारत का ग्रोथ रेट कोरोना से सबसे ज्‍यादा प्रभावित 5 देशों के बीच सबसे ज्‍यादा है। हालांकि ब्राजील का कोविड-19 डेटा कितना सही है, यह बता पाना मुश्किल है। क्‍योंकि वहां की हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री ने अपनी वेबसाइट से पिछले दिनों का डेटा हटवा दिया है। अब सिर्फ 24 घंटे का डेटा रखते हैं।

टेस्टिंग के आंकड़े देखने पर पता चलता है कि भारत, ब्राजील और बाकी तीन देशों में जमीन आसमान का अंसर है। प्रति 1,000 आबादी पर टेस्ट की संख्‍या देखें तो भारत सिर्फ 3 से थोड़ा ज्‍यादा लोगों का ही टेस्‍ट कर पा रहा है। रूस डेली 3 लाख टेस्‍ट कर रहा है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) डेटा के मुताबिक, भारत में अब करीब 1.4 लाख टेस्‍ट रोज हो रही है। हालांकि यह स्थिति अप्रैल के मुकाबले कहीं बेहतर है। टेस्टिंग बढ़ाने से हालात शायद और अच्‍छे से मैनेज हो पाते।

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