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लखनऊ: होटल अग्निकांड में उजागर हुई अफसरों की लापरवाही, आईएएस, पीसीएस समेत कई अधिकारी फंसे

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। चारबाग में स्थित होटल विराट और एसएसजे इंटरनेशन में हुए अग्निकांड की जांच रिपोर्ट आ गई है। जांच रिपोर्ट में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को भी दोषी माना गया है। इसके साथ ही इंजीनियरों, फायर, जिला प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गये हैं। सोमवार को शासन की तरफ से एलडीए को जांच रिपोर्ट की कॉपी भेजी गई है। इस रिपोर्ट में एलडीए के पूर्व संयुक्त सचिव राकेश कुमार का नाम भी शामिल है, जो मौजूदा समय अंबेडकरनगर में बतौर डीएम तैनात हैं। इसके साथ ही पीसीएस वीरेंद्र पांडेय को भी जांच में दोषी बताया गया है, जिनके पास उस समय न्यायिक विहित प्राधिकारी का चार्ज था। इसके अलावा चारबाग योजना में पिछले पांच वर्ष से तैनात इंजिनियरों को भी जिम्मेदार माना गया है।

इस मामले में आज एलडीए जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गये विभाग के लोगों पर सख्त कार्रवाई कर सकता हैै। इसको लेकर विभाग के इंजीनियर, सुपरवाइजर, मेठ और नोटिस सर्वरों की पहचान शुरू हो गयी है। बताया जा रहा है कि ज्यादतार इसमें मौजूदा समय में अभी एलडीए में ही तैनात हैं। सूत्रों की माने तो जांच में दोषी पाए गये अधिकारियों और इंजीनियरों पर कार्रवाई लगभग तय है लेकिन इसके लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जायेगी। सीएम ने इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिये थे।

वहीं, बिजली कनेक्शन देने में जिन अफसरों की भूमिका उजागर हुई थी उनके बारे में पहले ही रिपोर्ट जारी कर दी गयी थी। वहीं अग्निशमन विभाग की भी जांच रिपोर्ट में कलई खुली है, जो फायर की एनओसी देने में लापरवाही बरते थे। इसके साथ ही जांच में सामने आया कि, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने अवैध होने के बाद भी सराय एक्ट के तहत बिल्डिंग में होटल संचालन का लाइसेंस दिया।

जारी रिपोर्ट के मुताबिक दोषी पाए गए गजराज सिंह यादव, सहायक अभियंता राजेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता डीसी यादव, अवर अभियंता पीके वर्मा, शिव शंकर सिंह, मोहनचंद सती, सतीश चंद्र, पीएन पांडेय, अब्दुल रऊफ और अनिल कुमार सिंह के अलावा सुपरवाइजर राम पाल, हरिनाथ, शिव प्रसाद तिवारी और श्रीराम कश्यप, पेशकार बालकराम और अवर वर्ग सहायक महेंद्र प्रताप के खिलाफ कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। आरोपित बनाए गए सभी अधिकारी और इंजिनियरों के ऊपर शासन स्तर से ही कार्रवाई होनी है, क्योंकि इन सभी की नियुक्ति शासन से ही होती है। हालांकि इनमें से ज्यादातर इंजिनियर या तो रिटायर हो चुके हैं या फिर उनका तबादला हो चुका है।

बता दें, आवासीय प्लॉट पर बने होटल विराट और एसएसजे इंटरनेशनल को गिराने का आदेश पांच साल पहले ही हो चुका था। इसके बावजूद इंजिनियर आदेश को दबाए रहे। होटल अवैध तरीके से चलता रहा। इस बीच पिछले साल हुए हादसे में डेढ़ साल की मासूम बच्ची समेत सात लोगों की मौत होने के बाद इस गड़बड़ी से पर्दा उठा।

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