चीन ने 10 भारतीय सैनिकों की रिहाई तीन दिन तक लटकाए रखी कैसे?

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नई दिल्ली: गलवान नदी घाटी में 15 जून को खूनी संघर्ष के बाद भारत और चीन, दोनों के सैनिक एक-दूसरे के दावे वाले क्षेत्र में घूमते पाए गए, जिससे अपने-अपने घायल सैनिकों को ढूंढा जा सके. इस दौरान कुछ सैनिकों के शवों की भी पहचान की गई. उस पूरी रात ये बेरोकटोक एक दूसरे के क्षेत्र में जाने वाला मामला था. दोनों तरफ से अपने हताहत सैनिकों की पहचान की जल्दी थी.

How Did China Hang The Release Of 10 Indian Soldiers For Three Days :

एक लंबी तलाश के बाद, भारतीय सैनिकों ने करीब एक दर्जन चीनी सैनिकों को अगली सुबह कुछ घंटों में ही दूसरे पक्ष को सौंप दिया. कुछ अकाउंट्स के मुताबिक, जो चीनी सैनिक सौंपे गए, उनमें कर्नल रैंक का भी एक अधिकारी था. घायल चीनी कर्नल जो भारतीय सैनिकों के कब्जे में था, उसे बिना किसी विलंब लौटा दिया गया.

हालांकि, चीन ने ऐसा नहीं किया. उसने 50 से अधिक भारतीय सैनिकों को लौटाने में करीब 24 घंटे का वक्त लिया. ये वो भारतीय जवान थे जो संघर्ष के दौरान घायल हो गए थे और चीनी क्षेत्र में ही रह गए थे. सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कुछ भारतीय जवानों को मामूली चोटें आईं और कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए.

सभी भारतीय सैनिकों को नहीं लौटाया
बारीक डिटेल्स से अवगत सूत्रों ने बताया, ‘चीन ने फिर भी सभी भारतीय सैनिकों को नहीं लौटाया था. उसने 4 अधिकारियों समेत 10 भारतीयों को रोके रखा.’ अगले तीन दिन तक गहन वार्ता हुई, जिससे कि ये सुनिश्चित किया जा सके कि चीन ने जिन 10 भारतीयों को रोक रखा था, उनकी सुरक्षित वापसी हो सके.

सूत्रों ने बताया, ‘चीनी सेना ने इस बात से कभी इनकार नहीं किया कि भारतीय सैनिक उसके कब्जे में है. उसकी ओर से यही आश्वासन दिया जाता रहा कि भारतीय सैनिक सुरक्षित हैं, लेकिन साथ ही उन्हें भारतीय पक्ष को सौंपने में भी देर करता रहा.’

सूत्रों के मुताबिक, 10 भारतीय सैनिकों को सौंपने को लेकर चीनी सेना का कोई विरोध नहीं था, लेकिन वो भारतीयों को इंतजार कराती रही. एक सूत्र ने बताया, ‘चीनी सेना की ओर से विलंब के लिए प्रक्रियाओं का हवाला दिया जाता रहा, एक या दूसरे बहाने बनाकर चीजों को लटकाए रखने के लिए उसने कुछ और समय मांगा.’

नई दिल्ली: गलवान नदी घाटी में 15 जून को खूनी संघर्ष के बाद भारत और चीन, दोनों के सैनिक एक-दूसरे के दावे वाले क्षेत्र में घूमते पाए गए, जिससे अपने-अपने घायल सैनिकों को ढूंढा जा सके. इस दौरान कुछ सैनिकों के शवों की भी पहचान की गई. उस पूरी रात ये बेरोकटोक एक दूसरे के क्षेत्र में जाने वाला मामला था. दोनों तरफ से अपने हताहत सैनिकों की पहचान की जल्दी थी. एक लंबी तलाश के बाद, भारतीय सैनिकों ने करीब एक दर्जन चीनी सैनिकों को अगली सुबह कुछ घंटों में ही दूसरे पक्ष को सौंप दिया. कुछ अकाउंट्स के मुताबिक, जो चीनी सैनिक सौंपे गए, उनमें कर्नल रैंक का भी एक अधिकारी था. घायल चीनी कर्नल जो भारतीय सैनिकों के कब्जे में था, उसे बिना किसी विलंब लौटा दिया गया. हालांकि, चीन ने ऐसा नहीं किया. उसने 50 से अधिक भारतीय सैनिकों को लौटाने में करीब 24 घंटे का वक्त लिया. ये वो भारतीय जवान थे जो संघर्ष के दौरान घायल हो गए थे और चीनी क्षेत्र में ही रह गए थे. सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कुछ भारतीय जवानों को मामूली चोटें आईं और कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए. सभी भारतीय सैनिकों को नहीं लौटाया बारीक डिटेल्स से अवगत सूत्रों ने बताया, 'चीन ने फिर भी सभी भारतीय सैनिकों को नहीं लौटाया था. उसने 4 अधिकारियों समेत 10 भारतीयों को रोके रखा.' अगले तीन दिन तक गहन वार्ता हुई, जिससे कि ये सुनिश्चित किया जा सके कि चीन ने जिन 10 भारतीयों को रोक रखा था, उनकी सुरक्षित वापसी हो सके. सूत्रों ने बताया, 'चीनी सेना ने इस बात से कभी इनकार नहीं किया कि भारतीय सैनिक उसके कब्जे में है. उसकी ओर से यही आश्वासन दिया जाता रहा कि भारतीय सैनिक सुरक्षित हैं, लेकिन साथ ही उन्हें भारतीय पक्ष को सौंपने में भी देर करता रहा.' सूत्रों के मुताबिक, 10 भारतीय सैनिकों को सौंपने को लेकर चीनी सेना का कोई विरोध नहीं था, लेकिन वो भारतीयों को इंतजार कराती रही. एक सूत्र ने बताया, 'चीनी सेना की ओर से विलंब के लिए प्रक्रियाओं का हवाला दिया जाता रहा, एक या दूसरे बहाने बनाकर चीजों को लटकाए रखने के लिए उसने कुछ और समय मांगा.'