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यूपी का ‘ठहरा रथ’ भला कैसे हो गतिमान? जब​ दिल्ली के हाथ है लगाम : अखिलेश यादव

प्रदेश की योगी सरकार पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार हमलावर हैं। उन्होंने गुरुवार को तंज भरा ट्वीट कर इशारों-इशारों में यूपी की सत्ता केंद्र के हाथों में होने की बात कही है। अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है कि “उत्तर प्रदेश का ‘ठहरा रथ’ भला कैसे हो गतिमान, पहिया धंसा है यूपी में पर दिल्ली के हाथ लगाम?

By संतोष सिंह 
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How Is The Stay Chariot Of Up Moving Well When Delhi Has Control Over It Akhilesh Yadav

लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार हमलावर हैं। उन्होंने गुरुवार को तंज भरा ट्वीट कर इशारों-इशारों में यूपी की सत्ता केंद्र के हाथों में होने की बात कही है। अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है कि “उत्तर प्रदेश का ‘ठहरा रथ’ भला कैसे हो गतिमान, पहिया धंसा है यूपी में पर दिल्ली के हाथ लगाम?

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बता दें कुछ दिन पहले ही अखिलेश ने इसी तरह इशारों-इशारों में सरकार पर तंज किया था। उन्होंने लिखा था कि कभी खुले आसमान पर वो लिख देते थे ‘संदेशे’, अब किसी और के पते पर बंद लिफ़ाफ़े आते हैं।
अखिलेश यादव का ट्वीट

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सरकार को किसानों की नहीं है फिक्र, लगाए गंभीर आरोप

बुधवार को श्री यादव ने कहा कि भाजपा के 4 साल किसानों के लिए विनाशकारी साबित हुए हैं। तीन काले कृषि कानून लाकर किसानों को बड़े पूंजीघरानों को आश्रित बना दिया है। न किसान को फसल का दाम मिल रहा है और नहीं उससे किए गये वादे पूरे हो रहे हैं। पिछले दिनों हुई बरसात में हजारों टन गेहूं क्रय केंद्रों में खुले में पड़े रहने से बर्बाद हो गया। किसानों को बहाने बनाकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने फतेहपुर, संभल, अमरोहा में किसानों की परेशानी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार को उनकी दिक्कतों पर कतई ध्यान नहीं है।किसानों को क्रय केंद्रों पर तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को किसानों की जरा भी फिक्र नहीं है। उनकी धान की फसल भी वैसे ही बर्बाद हुई जैसी आज गेहूं की फसल के साथ हो रहा है। किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिला है। उसकी लागत की डयोढ़ा कीमत देने का वादा किया था। एमएसपी पर खरीद का भरोसा दिया जा रहा था लेकिन भाजपा सरकार ने किसानों के साथ कोई वादा नहीं निभाया। उल्टे उसे खेत के मालिक की जगह मजदूर बनाने का कुचक्र रच दिया।

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