प्रेग्नेंसी के दौरान लगातार हो रही है ब्लीडिंग तो ये उपाय हैं काफी कारगर

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अनेक तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होता है। ऐसे समय में किसी भी तरह की शारीरिक समस्या महसूस होनो पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान पहली तिमाही में रक्तस्त्राव होना यूं तो सामान्य घटना है लेकिन अगर यह रक्तस्त्राव अगर थोड़ा भी असामान्य लगता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में रक्तस्त्राव किसी गंभीर समस्या का सूचक हो सकता है।

गर्भावस्था में मासिक धर्म लगभग बंद हो चुका होता है इसलिए इस समय में रक्त-स्त्राव चिंता का विषय हो सकता है। गर्भधारण की पहली तिमाही में रक्त-स्त्राव उतना गंभीर मसला नहीं होता जितना आखिरी तिमाही में यह गंभीर हो सकता है। पहली तिमाही का रक्त-स्त्राव एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकता है, जिसमें भ्रूण महिला के गर्भाशय के बाहर स्थित हो जाता है। रक्त-स्त्राव इस बात का भी संकेत देता है कि आपकी कुछ दवाइयों से या फिर किसी तरह के संक्रमण की वजह से आपके बच्चे को तकलीफ पहुंच रही है। ऐसे समय में लापरवाही बरतना गर्भपात का कारण बन सकता है।

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गर्भावस्था में ब्लीडिंग के दौरान निकलने वाले खून के रंग और महक से भी इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ब्लीडिंग सामान्य है या खतरनाक। इसलिए ब्लीडिंग के वक्त इस पर ध्यान देना आवश्यक है। इसके अलावा अगर रक्तस्त्राव के साथ पेट दर्द या अन्य कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान कोई भी भारी काम करने से बचें। यह भी रक्तस्त्राव का एक कारण हो सकता है। डॉक्टर से बात करते वक्त अपनी हर समस्या को खुलकर सामने रखें। किसी भी तरह की असावधानी बड़े संकट का करण बन सकती है।