Lohri 2019: जाने क्यों मनाते हैं लोहड़ी और क्या है दुल्ला भट्टी की पूरी कहानी?

Lohri 2019: जाने क्यों मनाते हैं लोहड़ी और क्या है दुल्ला भट्टी की पूरी कहानी?
Lohri 2019: जाने क्यों मनाते हैं लोहड़ी और क्या है दुल्ला भट्टी की पूरी कहानी?

लखनऊ। मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर देशभर में खासतौर पर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में लोहड़ी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। साल के पहले मास जनवरी में जब यह पर्व मनाया जाता है उस समय सर्दी का मौसम जाने को होता है। यह पर्व कई मायनों में खास है। पारंपरिक तौर पर लोहड़ी का त्यौहार प्रकृति को धन्यवाद कहने के लिए मनाया जाता है इस दिन लोकगीत गाए जाते हैं और रंग-बिरंगी वेशभूषा में सभी झूम कर नृत्य करते हैं। आज हम आपको बताएँगे कि लोहड़ी के समय आग में गजक, रेवड़ी, मुंगफली क्यों अर्पित किया जाता है?

How To Celebrate Lohri Festival 2 :

लोहड़ी का अर्थ हैः ल (लकड़ी)+ ओह(गोहा यानि सूखे उपले)+ ड़ी(रेवड़ी)।
लोहड़ी के दिन आग में तिल, गजक, मूंगफली, गुड़, रेवड़ी, खील, मक्का और गन्ना इसलिए चढ़ाया जाता है क्योंकि अग्नि में आहुति देने से ये सब भगवान तक पहुंचता है और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। तिल, गुड़, रेवड़ी आदि आग में डालते वक्त लोग सुखी जीवन की कामना करते हैं।

लोहड़ी और दुल्ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी के गानों में दुल्ला भट्टी का जिक्र मिलता है। यह भी कहा जा सकता है कि लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता है। दरअसल, दुल्ला भट्टी का पंजाबियों के इतिहास में खास महत्व है। बताया जाता है कि मुगल शासक अगबर के शासनकाल के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब प्रांत में रहता था। उस समय संदल बार जो अब पाकिस्तान में स्थित है, लड़कियों को गुलामी के लिए जबरदस्ती ले जाया जाता था और अमीरों को बेच दिया जाता था।

लोहड़ी पर बेटियों को खास उपहार

लोहड़ी के मौके पर नवविवाहित बेटी के मायके से उसकी मां कपड़े, मिठाइयां, गच्चक एवं रेवड़ी के अलावा अनेक तरह के उपहार अपनी बेटी के लिए उसके ससुराल में भेजती है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इसी प्रकार पहले बच्चे के जन्म पर भी उसके ननिहाल से बच्चे एवं पूरे परिवार के लिए कपड़े, मिठाई, गच्चक, रेवड़ी एवं बच्चे के लिए अनेक उपहार भेजे जाते हैं।

लखनऊ। मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर देशभर में खासतौर पर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में लोहड़ी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। साल के पहले मास जनवरी में जब यह पर्व मनाया जाता है उस समय सर्दी का मौसम जाने को होता है। यह पर्व कई मायनों में खास है। पारंपरिक तौर पर लोहड़ी का त्यौहार प्रकृति को धन्यवाद कहने के लिए मनाया जाता है इस दिन लोकगीत गाए जाते हैं और रंग-बिरंगी वेशभूषा में सभी झूम कर नृत्य करते हैं। आज हम आपको बताएँगे कि लोहड़ी के समय आग में गजक, रेवड़ी, मुंगफली क्यों अर्पित किया जाता है? लोहड़ी का अर्थ हैः ल (लकड़ी)+ ओह(गोहा यानि सूखे उपले)+ ड़ी(रेवड़ी)। लोहड़ी के दिन आग में तिल, गजक, मूंगफली, गुड़, रेवड़ी, खील, मक्का और गन्ना इसलिए चढ़ाया जाता है क्योंकि अग्नि में आहुति देने से ये सब भगवान तक पहुंचता है और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। तिल, गुड़, रेवड़ी आदि आग में डालते वक्त लोग सुखी जीवन की कामना करते हैं। लोहड़ी और दुल्ला भट्टी की कहानी लोहड़ी के गानों में दुल्ला भट्टी का जिक्र मिलता है। यह भी कहा जा सकता है कि लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता है। दरअसल, दुल्ला भट्टी का पंजाबियों के इतिहास में खास महत्व है। बताया जाता है कि मुगल शासक अगबर के शासनकाल के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब प्रांत में रहता था। उस समय संदल बार जो अब पाकिस्तान में स्थित है, लड़कियों को गुलामी के लिए जबरदस्ती ले जाया जाता था और अमीरों को बेच दिया जाता था। लोहड़ी पर बेटियों को खास उपहार लोहड़ी के मौके पर नवविवाहित बेटी के मायके से उसकी मां कपड़े, मिठाइयां, गच्चक एवं रेवड़ी के अलावा अनेक तरह के उपहार अपनी बेटी के लिए उसके ससुराल में भेजती है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इसी प्रकार पहले बच्चे के जन्म पर भी उसके ननिहाल से बच्चे एवं पूरे परिवार के लिए कपड़े, मिठाई, गच्चक, रेवड़ी एवं बच्चे के लिए अनेक उपहार भेजे जाते हैं।