Facebook पर Fake News को पहचानने के ये हैं तरीके

FILE PHOTO - A 3D plastic representation of the Facebook logo is seen in this illustration photo May 13, 2015. REUTERS/Dado Ruvic/Illustration/File Photo

सोशल मीडिया पर लगातार फर्जी ख़बरों को भी हवा दी जाती है और कई बार इनके परिणाम भयानक सिद्ध होते हैं। पिछले काफ़ी समय से सोशल दिग्गज़ फेसबुक पर तेजी से फर्जी ख़बरें देखी गईं है और इन ख़बरों का सच्चाई से कुछ लेना-देना नहीं निकला। फेसबुक अपनी तरफ़ से इस तरह की ख़बरों को रोकने और यूज़र को इन्हें पहचानने के लिए कोशिशें कर रही है।

हेडलाइन (शीर्षक) को लेकर सजग रहें: फर्जी ख़बरों में अधिकतर बड़े अक्षरों और विस्मयबोधक चिन्ह के साथ हेडलाइन दी जाती है ताकि पाठक इनकी तरफ़ आकर्षित हो सके। अगर आपको हेडलाइन देखकर इनके दावे चौंकाने वाले लग रहे हों तो इन पर भरोसा न करें क्योंकि ये फर्जी हो सकती हैं।

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यूआरएल को गौर से देखें: नकली या किसी और यूआरएल की तरह दिखने वाला यूआरएल एड्रेस फर्जी ख़बर का संकेत हो सकता है। कई फर्ज़ी ख़बरें देने वाली न्यूज़ वेबसाइट असली यूआरएल में थोड़े बहुत बदलाव करके भ्रमित करती हैं। असली और नकली यूआरएल की तुलना के लिए आप प्रमाणित यूआरएल साइट पर जाकर कर सकते हैं।

सोर्स की जांच करें: यह सुनिश्चित करें कि ख़बर एक सैसे सोर्स द्वारा लिखी गई है जिस पर आप विश्वास करते हैं और जिसे सही ख़बर देने के लिए जाना जाता है। अगर ख़बर किसी ऐसे सोर्स द्वारा लिखी गई है जिसके बारे में जानकारी नहीं है तो उनके “About” सेक्शन में जाकर उनके बारे में ज़्यादा जानकारी बटोरें।

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असामान्य फॉरमेटिंग देखें: अधिकतर गलत ख़बरों वाली वेबसाइट पर वर्तनी की गलतियां और गलत स्पेलिंग लिखी मिलती है। इसके अलावा लेआउट भी अजीबोगरीब रहता है। अगर आपको ऐसे कोईी संकेत मिलते हैं तो सावधान रहें।

तस्वीरों पर ध्यान दें: फर्जी ख़बरों में अकसर ऐसी तस्वीरें व वीडियो पोस्ट किए जाते हैं जिनसे छेड़छाड़ की गई होती है। कई बार तस्वीरें असली भी हो सकती हैं लेकिन उनका कहानी से कोई संबंध नहीं होता है। तस्वीरों या वीडियो के बारे में आप जानकारी खोजकर निकाल सकते हैं कि उनका सोर्स क्या है।

तारीख जांचें: फर्जी न्यूज़ स्टोरी में ऐसी टाइमलाइन हो सकती है जिसका कोई मतलब ना हो। या फिर हो सकता है कि तारीख को बदल दिया गया हो।

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सबूत का पता करें: जिस लेखक के नाम से ख़बर लिखी गई है, उसके सोर्स के बारे में पता करें कि वो सही है या नहीं। अगर आपको सोर्स के बारे में सही सबूत नहीं मिलते या फिर ख़बर में किसी लेखक का नाम नहीं है तो यह एक फर्जी ख़बर होने के संकेत हैं।

दूसरी ख़बरें देखें: अगर आप पाते हैं कि एक ख़बर को किसी और न्यूज़ सोर्स ने कवर नहीं किया है, तो ये संकेत हो सकते हैं कि ख़बर फर्जी है। अगर किसी ख़बर की रिपोर्ट कई सारे सोर्स ने दी है तो इसके सच होने के दावा ज़्यादा मजबूत हो जाता है।

कहानी या मजाक?: कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यंग्य या मज़ाक और फर्जी ख़बरों में अंतर करना मुश्किल होता है। इसलिए ध्यान देना जरूरी है कि सोर्स को मज़ाक यानी पैरोडी से जुड़ी चीजों के लिए तो नहीं जाना जाता? और ख़बर को इस तरह तो नहीं लिखा गया है कि इसे सिर्फ मजाक के इरादे से पेश किया गया हो।

जानबूझकर गढ़ी गईं झूठी कहानियां: जिस भी ख़बर को आप पढ़ रहे हैं तो उसके बारे में ध्यानपूर्वक सोचें और उसे साझा करने से पहले यह बात पक्की कर लें कि वह भरोसा करने के लायक हो।

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