कोरोना की मार से अर्थव्यवस्था का हो कैसे उपचार, 50 शीर्ष अधिकारियों संग बैठक

India's Top Government Adviser Says Election Won't Stop Reforms

नई दिल्ली: कोरोना वैश्विक महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बाधित हो गई है। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई स्तरों पर अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में मोदी सरकार द्वारा कई कदम भी उठाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से पता चला है कि कोरोना महामारी से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का आकलन करने के लिए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वित्त और वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े आला अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं।

How To Treat The Economy Due To Corona Hit Meeting With 50 Top Officials :

प्रधानमंत्री का मेन एजेंडा अर्थव्यवस्था

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री का मेन एजेंडा अर्थव्यवस्था में तेजी के साथ कैसे सुधार किया जाये क्योंकि पिछले कुछ महीने से कोरोना महामारी के चलते मंडी, बाजार, दुकानें, शॉपिंग मॉल, आदि में उपभोक्ताओं की मांग में कमी आई है। जिसके चलते देश में मंदी बढ़ती जा रही है। तकरीबन डेढ़ घंटे की इस निर्धारित वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग बैठक के दौरान स्थिति पर वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों के अधिकारी अपना-अपना विचार विमर्श देंगे।

प्रधानमंत्री करीब 50 अपर अधिकारियों से ले रहे राय 

मीडिया रिपोर्ट के हवाला से बताया गया कि प्रधानमंत्री करीब 50 अपर अधिकारियों से राय ले रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के आर्थिक सलाहकार परिषद, प्रधान और मुख्य आर्थिक सलाहकर के साथ अलग-अलग बैठकें भी की थी।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए मोदी सरकार ने तैयार किया रोडमैप

कोरोना जैसी भयानक महामारी से निपटने के लिए मोदी सरकार ने मई में अर्थव्यवस्था को उबारने और व्यवसायों में आ रही आर्थिक बहाली का रोडमैप का स्वरूप तय करते हुए 20.97 लाख करोड़ के एक बड़े वित्तीय ऐतिहासिक पैकेज का ऐलान किया गया था। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार कोरोना महामारी कि चलते भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रेहे प्रभावों का पूर्ण रूप से आकलन कर रही है और अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो और भी कदम उठाये जाएंगे।

अर्थव्यवस्था के सामान्य स्थिति की तरफ लौटने के दिख रहे आसार

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास जी ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामान्य स्थिति की तरफ लौटने के संकेत दिखने लगे हैं। लॉकडाउन के दौरान जो भी सरकार ने प्रतिबंध लगाए थे उनमें अब ढील दिए जाने के बाद गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभी अनिश्चित है कि आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से कब शुरू हो जाएगी। मांग की स्थिति सामान्य होने में कितना समय लगेगा और यह महामारी हमरे बीच कितने समय तक रहती है और कितने लंबे समय तक प्रभाव छोड़ती है यह देखने की बात है। रिजर्व बैंक के गवर्नर यहां 7वें एसबीआई बैंकिंग एण्ड इकोनोमिक्स कन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के लिये विकास पहली प्राथमिकता है लेकिन इसके साथ ही वित्तीय स्थिरता भी उतनी ही महतवपूर्ण है। देश में लॉकडाउन लगाने और उसमें लागू नियम और कानूनों में अब ढ़ील दे दी गई है, प्रतिबंधों में ढील के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था के सामान्य स्थिति की तरफ लौटाने के आसार तो दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने लक्ष्य विशेष से संबंधित और व्यापक स्तर के सुधार के तमाम उपायों की पहले ही घोषणा कर दी है, इनसे देश की संभावित वृद्धि को मदद मिलेगी।

नई दिल्ली: कोरोना वैश्विक महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बाधित हो गई है। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई स्तरों पर अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में मोदी सरकार द्वारा कई कदम भी उठाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से पता चला है कि कोरोना महामारी से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का आकलन करने के लिए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वित्त और वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े आला अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री का मेन एजेंडा अर्थव्यवस्था

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री का मेन एजेंडा अर्थव्यवस्था में तेजी के साथ कैसे सुधार किया जाये क्योंकि पिछले कुछ महीने से कोरोना महामारी के चलते मंडी, बाजार, दुकानें, शॉपिंग मॉल, आदि में उपभोक्ताओं की मांग में कमी आई है। जिसके चलते देश में मंदी बढ़ती जा रही है। तकरीबन डेढ़ घंटे की इस निर्धारित वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग बैठक के दौरान स्थिति पर वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों के अधिकारी अपना-अपना विचार विमर्श देंगे।

प्रधानमंत्री करीब 50 अपर अधिकारियों से ले रहे राय 

मीडिया रिपोर्ट के हवाला से बताया गया कि प्रधानमंत्री करीब 50 अपर अधिकारियों से राय ले रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के आर्थिक सलाहकार परिषद, प्रधान और मुख्य आर्थिक सलाहकर के साथ अलग-अलग बैठकें भी की थी।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए मोदी सरकार ने तैयार किया रोडमैप

कोरोना जैसी भयानक महामारी से निपटने के लिए मोदी सरकार ने मई में अर्थव्यवस्था को उबारने और व्यवसायों में आ रही आर्थिक बहाली का रोडमैप का स्वरूप तय करते हुए 20.97 लाख करोड़ के एक बड़े वित्तीय ऐतिहासिक पैकेज का ऐलान किया गया था। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार कोरोना महामारी कि चलते भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रेहे प्रभावों का पूर्ण रूप से आकलन कर रही है और अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो और भी कदम उठाये जाएंगे।

अर्थव्यवस्था के सामान्य स्थिति की तरफ लौटने के दिख रहे आसार

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास जी ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामान्य स्थिति की तरफ लौटने के संकेत दिखने लगे हैं। लॉकडाउन के दौरान जो भी सरकार ने प्रतिबंध लगाए थे उनमें अब ढील दिए जाने के बाद गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभी अनिश्चित है कि आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से कब शुरू हो जाएगी। मांग की स्थिति सामान्य होने में कितना समय लगेगा और यह महामारी हमरे बीच कितने समय तक रहती है और कितने लंबे समय तक प्रभाव छोड़ती है यह देखने की बात है। रिजर्व बैंक के गवर्नर यहां 7वें एसबीआई बैंकिंग एण्ड इकोनोमिक्स कन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के लिये विकास पहली प्राथमिकता है लेकिन इसके साथ ही वित्तीय स्थिरता भी उतनी ही महतवपूर्ण है। देश में लॉकडाउन लगाने और उसमें लागू नियम और कानूनों में अब ढ़ील दे दी गई है, प्रतिबंधों में ढील के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था के सामान्य स्थिति की तरफ लौटाने के आसार तो दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने लक्ष्य विशेष से संबंधित और व्यापक स्तर के सुधार के तमाम उपायों की पहले ही घोषणा कर दी है, इनसे देश की संभावित वृद्धि को मदद मिलेगी।