रविवार को बन रहा है खास योग, इन उपायों से दूर होगा बुरा समय

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रविवार को बन रहा है खास योग, इन उपायों से दूर होगा बुरा समय

लखनऊ। इस रविवार यानि 10 जून को ज्येष्ठ मास के मलमास की एकादशी है। रविवार को एकादशी होने से यह तिथि बहुत खास हो गई है। मलमास में एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। बात करें ज्योतिष की तो सूर्य को रविवार का कारक ग्रह माना गया है ऐसे में एकादशी और रविवार के योग में विष्णुजी के साथ ही सूर्य के उपाय किए जाए तो बुरा से बुरा समय भी दूर किया जा सकता है।

How To Worship Lord Sun 2 :

जानिए एकादशी पर सूर्य पूजन की खास विधि

  • सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य पूजा के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का लें। किसी ऐसे स्थान पर जाएं जहां से सूर्य देव आसानी दिख रहे हैं।
  • लोटे में साफ जल भरें और थाली में लाल चंदन, लाल फूल, चावल, प्रसाद के लिए गुड़ और अन्य पूजन सामग्री रखें। एक दीपक रखें।
  • लोटे में जल के साथ एक चुटकी लाल चंदन पाउडर मिला लें। लोटे में लाल फूल भी डाल लें। थाली में दीपक जलाएं और लोटा रख लें। थाली नीचे जमीन पर रखें।
  • इसके बाद ऊँ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को प्रणाम करें।
  • लोटे से सूर्य देवता को जल चढ़ाएं। सूर्य मंत्र का जाप करते रहें। इस प्रकार से सूर्य को जल चढ़ाना सूर्य को अर्घ्य देना कहलाता है।
  • अर्घ समर्पित करते समय लोटे से गिरने वाली जल की धारा से सूर्य को देखें।
  • ऊँ सूर्याय नमः अर्घ्यं समर्पयामि कहते हुए पूरा जल सूर्यदेव को चढ़ाएं।
  • सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव की आरती करें। गुड़ का प्रसाद चढ़ाएं।
  • सूर्य का ध्यान करते हुए सात प्रदक्षिणा करें और हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
लखनऊ। इस रविवार यानि 10 जून को ज्येष्ठ मास के मलमास की एकादशी है। रविवार को एकादशी होने से यह तिथि बहुत खास हो गई है। मलमास में एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। बात करें ज्योतिष की तो सूर्य को रविवार का कारक ग्रह माना गया है ऐसे में एकादशी और रविवार के योग में विष्णुजी के साथ ही सूर्य के उपाय किए जाए तो बुरा से बुरा समय भी दूर किया जा सकता है।जानिए एकादशी पर सूर्य पूजन की खास विधि
  • सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य पूजा के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का लें। किसी ऐसे स्थान पर जाएं जहां से सूर्य देव आसानी दिख रहे हैं।
  • लोटे में साफ जल भरें और थाली में लाल चंदन, लाल फूल, चावल, प्रसाद के लिए गुड़ और अन्य पूजन सामग्री रखें। एक दीपक रखें।
  • लोटे में जल के साथ एक चुटकी लाल चंदन पाउडर मिला लें। लोटे में लाल फूल भी डाल लें। थाली में दीपक जलाएं और लोटा रख लें। थाली नीचे जमीन पर रखें।
  • इसके बाद ऊँ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को प्रणाम करें।
  • लोटे से सूर्य देवता को जल चढ़ाएं। सूर्य मंत्र का जाप करते रहें। इस प्रकार से सूर्य को जल चढ़ाना सूर्य को अर्घ्य देना कहलाता है।
  • अर्घ समर्पित करते समय लोटे से गिरने वाली जल की धारा से सूर्य को देखें।
  • ऊँ सूर्याय नमः अर्घ्यं समर्पयामि कहते हुए पूरा जल सूर्यदेव को चढ़ाएं।
  • सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव की आरती करें। गुड़ का प्रसाद चढ़ाएं।
  • सूर्य का ध्यान करते हुए सात प्रदक्षिणा करें और हाथ जोड़कर प्रणाम करें।